भारतकोश
ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश

ब्रह्मचर्यामृत अर्थात् जीवन सन्देश

Brahmacharyamrit Arthat Jeevan Sandesh

स्वामी ओमानन्द सरस्वती द्वारा

स्रोत: गुरुकुल झज्जर संस्करण · गुरुकुल झज्जर (हरियाणा) (उद्गम)

DevanagariHindipublished26 पृष्ठ

पृष्ठ 25, कुल 26 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 25

में गाँव से दूर नहर के किनारे इनके चवालीस एकड़ भूमि में योगियों के आश्रम सदृश इनका घर है। जिसमें नित्य दोनों समय पूरा परिवार मिलकर ब्रह्मयज्ञ तथा अग्निहोत्र करते हैं। पूर्ण वैदिक जीवन जीते हुए यह परिवार पूर्ण आनन्द को प्राप्त कर रहा है।

पुत्र-पुत्रियाँ भी पिता-पितामह के चरणचिन्हों का अनुसरण करके चल रहे हैं। माता धनकौर देवी जी ने इस पुस्तक के प्रकाशन के लिए एक लाख रुपये सात्विक दान दिया है। इसके लिए इस परिवार को कोटि-कोटि धन्यवाद तथा प्रभु से प्रार्थना है कि इस प्रकार के लाखों करोड़ों परिवार भारत में हों जिससे कि देश धर्म की उन्नति हो सके।

इस पुस्तक को पढ़कर आज की भटकती हुई युवा पीढ़ी अवश्य ही प्रेरणाप्राप्त अपने जीवन को व राष्ट्र समाज की अवश्य ही सुख पहुँचायेगी।

आचार्य बलदेव

आर्य महाविद्यालय गुरुकुल कालवा, जिला जीन्द (हरयाणा)

दूरभाष : 01686-268348

यशवन्त आर्य:

२४

Scanned with CamScanner