भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished893 पृष्ठ

पृष्ठ 126, कुल 893 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 126

१३० ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

वेद मन्त्रों के समुच्चारण के घोष से वह आश्रम सभी ओर से प्रतिध्वनित हो रहा था ।३६। मन्त्रोच्चारण पूर्वक दी हुई आहुतियों के द्वारा जो होम किया जाता है उसका अन्य वनों में फैलने वाले गन्ध से जो सभी ओर है उससे समस्त पापों का समूह जिससे निरस्त हो गया है ऐसा वह आश्रम है ।४०। हे राजन् ! समिधाओं और कुशाओं के आहरण करने वाले तथा दण्ड, मेखला और मृगछालाओं से विभूषित, परम सुन्दर मुनियों के कुमारों से सायने वह आश्रम शोभा युक्त है ।४१। बीच में इधर-उधर हाथों में पुष्प और जल लिए हुए सञ्चरण करने वाली कन्याओं से वह आश्रम उपशोभित है ।४२।

सपोतहरिणीयूथैर्विस्त्रंभादविशंकिभिः ।
उटजांगणपर्यन्ततरुच्छायास्नधिष्ठितम् ।।४३
रोमंकतः परामृष्टियूथसाक्षिकमुत्प्रदैः ।
प्रारब्धतांडवं केकीमयूरैर्मधुरस्वरैः ।।४४
प्रविकीर्णकणोद्देशं मृगशब्दैः समीपगैः समीपर्गैः ।
अनालीढातपच्छायाशुष्यन्नीवारराशिभिः ।।४५
हूयमानानलं काले पूज्यमानातिथिप्रजम् ।
अभ्यस्यमानच्छंदौघं चित्यमानागमोदितम् ।।४६
पठ्यमानाखिलस्मार्त्त श्रौतार्थप्रविचारणम् ।
प्रारब्धपितृदेवेज्यं सर्वभूतमनोहरम् ।।४७
तपस्विजनभूयिष्ठमकापुरुषसेवितम् ।
तपोवृद्धिकरं पुण्यं सर्वसत्त्वसुखास्पदम् ।।४८
तपोधनानन्दकरं ब्रह्मलोकमिवापरम् ।
प्रसूनसौरभभ्राम्यन्मधुव्रतावनादितम् ।।४९

अहिंसा के पूर्ण विश्वास से शङ्का से रहित अपने छोटे-छोटे बच्चों के सहित हरिणियों के झुण्ड जिससे मुनियों कुटियों के आँगन में लगे हुए वृक्षों की छाया में बैठे हुए हैं ।४३। रोमन्थ से परामृष्टि यूथ के साक्षिक आनन्द के प्रदान करने वाले तथा मधुर स्वर से समन्वित वाणी बोलने वाले मयूरों का नृत्य जिस आश्रम में प्रारम्भ होगया है ।४४। समीप में गमन

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २) · पृष्ठ 126, कुल 893 में से · BharatKosha