भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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२८२ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

के द्वारा प्रेषित असुर का मर्दन करने वाले हैं।२७। तृणावर्त्त असुर को तृण के समान हनन करके डाल दिया है और जो दो अर्जुन वृक्षों का जोड़ा शाप वश वृक्ष हो गये थे उनका भंजन कर वृक्षों की योनि छुड़ा देने वाले हैं। बहुत ही ऊँचे तालों के भेदन करने वाले हैं तथा तमाल वृक्षों के सदृश श्यामल आकृति वाले हैं ।२८।

गोपगोपीश्वरो योगी सूर्यकोटिसमप्रभः ।
इलापतिः परंज्योतिर्यादवेंद्रो यदूद्वहः ॥२६
वनमाली पीतवासाः पारिजातापहारकः ।
गोवर्द्धनाचलोद्धर्त्ता गोपालः सर्वपायकः ॥३०
अजो निरंजनः कामजनकः कंजलोचनः ।
मधुहा मथुरानाथो द्वारकानाथको बली ॥३१
वृंदावनांतसंचारी तुलसीदामभूषणः ।
स्यमंतकमणेर्हर्त्ता नरनारायणात्मकः ॥३२
कुब्जाकृष्टांबरधरो मायी परमपूरुषः ।
मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारदः ॥३३
संसारवैरी कंसारिर्मुरारिर्नरकांतकः ।
अनादि ब्रह्मचारी च कृष्णाव्यसनकर्षकः ॥३४
शिशुपालशिरश्छेत्ता दुर्योधनकुलांतकृत् ।
विदुराक्रूरवरदो विश्वरूपप्रदर्शकः ॥३५

ब्रज में समस्त गोप और जो गोपियां थीं उन सबके ईश हैं—महा योगी और करोड़ों सूर्यों की प्रभा के समान प्रदीप्त प्रभा से समन्वित हैं। इला के पति—परम ज्योति स्वरूप यादवों में प्रमुख और यदु कुल के उद्-हन करने वाले हैं ।२६। वनमाला के धारण करने वाले-पीत वर्ण के वस्त्रों के पहिनने वाले तथा पारिजात का महेन्द्रपुरी से आहरण करने वाले हैं—गोवर्द्धन गिरि के उद्धर्त्ता अर्थात् अपनी अंगुलि पर उठाने वाले—गौओं के पालन-पोषण करने वाले और समस्त चरअचरों के पालक हैं ।३०। अजन्मा-निरंजन-कामदेव के जन्म दाता तथा कमलों के सदृश लोचनों वाले हैं। मधु नामक दैत्य के हनन कर्त्ता—मथुरापुरी के नाथ-द्वारका के स्वामी और