संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअगस्त्य द्वारा श्रीकृष्ण प्रेमामृत का कथन ] [ २८१
तृणीकृततृणावर्त्तो यमलार्जुनभंजनः ।
उत्तालतालभेत्ता च तमालश्यामलाकृतिः ॥२८॥
वसुदेव को पुत्र—परम पुण्यमय—लीला ही से मानुष शरीर के धारण करने वाले हैं। श्रीवत्स का चिह्न और कौस्तुभ मणि धारण के करने वाले-यशोदा के वत्सल और हरि हैं। हरि का अर्थ होता है पापों के हरण करने वाले हैं। २२। चार भुजाओं में सुदर्शन चक्र, कौमोदकी गदा, शङ्ख और असि आदि आयुधों के धारण करने वाले हैं। देवकी के नन्दन—श्रीदेवी के स्वामी और नन्दगोप की प्रिया यशोदा के आत्मज अर्थात् पुत्र हैं। २३। यमुना के वेग का संहार करने वाले। बलभद्रजी परम प्रिय अनुज अर्थात् छोटे भाई हैं। पूतना के जीवन का हरण करने वाले तथा शकटासुर का हनन करने वाले हैं। २४। नन्दगोप ब्रह्मजन अर्थात् ब्रजवासी मनुष्यों को आनन्द देने वाले और सत्-चित् (ज्ञान) तथा आनन्द के शरीर वाले हैं अर्थात् सत्-चित् और आनन्द ये तीनों ही वस्तुएँ उनके शरीर में विद्यमान हैं। नवनीत (मक्खन) से विलिप्त अङ्गों वाले हैं जिस समय में यशोदाजी दधि मन्थन कर रही थी उस समय में दधिभाण्ड का भयंकर नवनीत अपने समस्त अङ्गों में लपेट लिया था। नवनीत के लिए नट हैं अर्थात् थोड़ा सा नवनीत पाने के लिए गोपाङ्गनाओं के यहाँ अनेक नृत्य आदि की लीलायें करने वाले हैं। अनघ अर्थात् निष्पाप स्वरूप वाले हैं। २५। नवनीत के थोड़े से भाग का आहार करने वाले हैं अर्थात् दधि और मक्खन के विक्रय करने वाली ब्रजाङ्गनाओं को मार्ग में रोककर नवनीत का आहार किया करते हैं। राजा मुचुकुन्द के ऊपर कृपा करने वाले हैं। जिस समय जरासन्ध से युद्ध हो रहा था तब स्वयं भाग कर वहाँ पर पहुँच गये थे जहाँ पर निद्रित मुचुकुन्द गुफा में यह वरदान लेकर सो रहा था कि उसे जो भी जगायेगा वह भस्म हो जायगा। उस पर अपनी पीताम्बर डालकर आप छिप गये थे जरासन्ध ने उसे श्रीकृष्ण समझ कर जगाया और भस्म हो गया था फिर भगवान् ने दर्शन देकर उसको प्रसन्न किया था। सोलह सहस्र स्त्रियों के स्वामी हैं-त्रिभङ्गी हैं अर्थात् चरण-कटि और ग्रीवा तीनों को तिरछा करके बंशी वादन करने वाले हैं तथा परमाधिक मधुर आकृति से समन्वित हैं। २६। अमृत के समान जो शुकदेव की वाणी रूपी सागर है उसके आप चन्द्र हैं अर्थात् शुकदेव जी के द्वारा श्रीमद्भागवत की रचना हुई उसके प्रकाशन चन्द्र हैं। गोविन्दों के पति हैं। जब आप बालक थे तब ब्रज में गोवत्सों का पालन करने के लिए वन में सञ्चरण करने वाले हैं तथा धेनुक नामक कंस