संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 295, कुल 893 में से
संदर्भ में पढ़ेंभार्गव-चरित्र (२) ] [ २६६
नागास्तु कोटिशस्तत्र हयस्यंदनपत्तयः । असंख्याता महाराज सैन्ये सागरसन्निभे ॥२१
मैंने इस समस्त भूमि को जीत लिया है और बलात् समस्त भूपालों को बाँधकर अपने पुर में मैं ले आया हूँ । वह सभी बल मुझमें विद्यमान है । एतएव अब मैं तुम्हारे साथ युद्ध अवश्य करूँगा ।१५। इतना कहकर उस हैहय पति ने उस दूत को अपने यहाँ से शीघ्र ही विदाकर दिया था । और फिर बोलने वालों में परम श्रेष्ठ ने अपनी समस्त सेना के अध्यक्ष को बुला कर उसको आदेश दिया था ।१६। हे महाभाग ! आप तो महान् वीरों के द्वारा माने हुए वीर हैं । इसी समय मेरी अपनी सब सेना को सज्जित करिए । मैं अभी भृगु राम के साथ युद्ध करूँगा अतः इस कार्य में विलम्ब न होवे ।१७। जब इस रीति से शीघ्र ही सेना के सुसज्जित करने के लिये सेनाध्यक्ष से कहा गया था तो उस प्रतापन नामक सेनाध्यक्ष ने चतुरङ्गिणी सेना को बहुत ही शीघ्र सज्जित करके राजा से निवेदन कर दिया था कि सब सेना प्रस्तुत है ।१८। हे विशांपते ! जिस समय में कार्त्तवीर्य नृप ने आनन्द से युक्त होते हुए अपनी सेना को पूर्णतया सुसज्जित सुना था तो वे सारथि के द्वारा लाये हुए अपने रथ पर समारूढ़ हो गये थे ।१६। उस राजा कार्त्तवीर्य के चारों ओर अनेक अक्षौहिणीयों से समन्वित होकर बड़े-बड़े सामन्त मंडलेश्वर उस राजा को परिवारित करके स्थित हो गये थे ।२०। हे महाराज ! वहाँ पर सेना में करोड़ों की संख्या में हाथी-अश्व-रथ ओर पैदल सैनिक थे जिनकी कोई भी संख्या नहीं थी और वह सेना एक महान् सागर के ही सदृश थी ।२१।
दृशन्ते तत्र भूपाला नानावंशसमुद्भवाः । महावीरा महाकाया नानायुद्धविशारदाः ॥२२ नानाशास्त्रस्त्रकुशला नानावाहगता नृपाः । नानालंकारसंयुक्ता मत्ता दानविभूषिताः ॥२३ महामात्रकृतोद्देशा भान्ति नागा ह्यनेकंशः । नानाजातिसमुत्पन्ना हयाः पवनरंहसः ॥२४ प्लवंतो भान्ति भूपाल सादिभिः कृतशिक्षणाः । स्यन्दनानि सुदीर्घाणि जवनाश्वयुतानि च ॥२५