संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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।२४। ऐसी भगवती भद्रकाली का दर्शन करके परशुराम जी ने अपने सभी शस्त्र-अस्त्रों का परित्याग कर दिया था और देवी के चरणों में प्रणाम करके फिर उसकी भली भाँति स्तुति की थी। परशुराम ने कहा—आप तो भगवान् शङ्कर की प्रियवल्लभा हैं और इस सम्पूर्ण जगत् को जन्म देने वाली हैं। आपके लिए मेरा नमस्कार है। ३५।
नानाविभूषाभिरिभारिगायै प्रपन्नरक्षाविहितोद्यमायै । दक्षप्रसूत्यै हिमवद्भव्यायै महेश्वरार्द्धांगसमास्थितायै ।।३६ काल्यै कलानाथकलाधरायै भक्तप्रियायै भुवनाधिपायै । ताराभिधायै शिवतत्परायै गणेश्वरा राधितपादुकायै ।।३७ परात्परायै परमेष्ठिदायै तापत्रयोन्मूलनर्चितनायै । जगद्धितायास्तपुरत्रयायै बालादिकायै त्रिपुराभिधायै ।।३८ समस्तविद्यासुविलासदायै जगज्जनन्यै निहिताहितायै । बकाननायै बहुसौख्यदायै विध्वस्तनानासुरदानवायै ।।३६ वराभयालंकृतदोर्लतायै समस्तगीर्वाणनमस्कृतायै । पीतांबरायै पवनाशुगायै शुभप्रदायै शिवसंस्तुतायै ।।४० नागारिगायै नवखण्डपायै नीलाचलाभांगलसत्प्रभायै । लघुक्रमायै ललिताभिधायै लेखाधिपायै लवणाकरायै ।।४१ लोलेक्षणायै लयवर्जितायै लाक्षारसालंकृतपंकजायै । रमाभिधायै रतिसुप्रियायै रोगापहायै रचिताखिलायै ।।४२
आप विविध प्रकार के आभूषणों से समलंकृता हैं और इभारि के द्वारा गान की गयीं हैं। आपकी शरणागति में प्रपन्न हो जाते हैं उनकी सुरक्षा के लिये आप उद्यम करने वाली हैं। आपने प्रजापति दक्ष के घर में जन्म धारण किया है और हिमवान् के यहाँ भी आप समुत्पन्न हुई हैं। आप साक्षात् महेश्वर की पाणिपरिणीता प्रिय पत्नी बनकर उनके अर्द्धाङ्ग में समास्थित हुई हैं। ३६। आप कला नाथ की कला के धारण करने वाली हैं—अपने भक्तों की प्रिय काली हैं और समस्त भुवनों की स्वामिनी हैं। तारा नाम वाली हैं—भगवान् शिव की सेवा में सर्वदा तत्पर रहा करती हैं