संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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था इससे वे सभी बहुत वर्षों तक नरक में जायेंगे । क्योंकि वे सब ब्रह्मदण्ड से हत हैं अतएव उनकी पिण्डोदक क्रिया भी कुछ नहीं हो सकती है ।४२।
पिंडोदकविहीनानामिह लोके महामुने । विद्यते पितृसालोक्यं न खलु श्रुतिचोदितम् ॥४३ अक्षयः स्वर्गवासोऽस्तु तेषां तु त्वत्प्रसादतः । वरेणानेन भगवन्कृतकृत्यो भवाम्यहम् ॥४४ तत्प्रसीद त्वमेवैषां स्वर्गतेर्वद कारणम् । येनोद्धारणमेतेषां वह्नेः कोपस्य वै भवेत् ॥४५ ततस्तमाह योगीन्द्रः सुप्रसन्नेन चेतसा । निरयोद्धारं तेषां त्वया वत्स न शक्यते ॥४६ तैंश्चापि नरके तावद्वस्तव्यं पापकर्मभिः । कालः प्रतीक्ष्यतां तावद्यावत्त्वत्पौत्रसंभवः ॥४७ कालांते भविता वत्स पौत्रस्तव महामतिः । राजा भगीरथो नाम सर्वधर्मार्थतत्त्ववित् ॥४८ स तु यत्नेन महता पितृगौरवयंत्रितः । आनेष्यति दिवो गंगां तपस्तप्त्वा महद्ध्रुवम् ॥४९
हे महामुने ! इस लोक में जिनकी पिण्डोदक क्रिया नहीं होती है वे पितृगण के लोक में उनका सालोक्य प्राप्त नहीं कर सकते हैं—ऐसा श्रुति सम्मत प्रमाण है ।४३। अब मेरा यही वर मुझे प्रदान कीजिए कि आपके प्रसाद से उनको अक्षय स्वर्ग का निवास प्राप्त होवे । हे भगवान् ! इस वरदान से मैं कृत-कृत्य हो जाऊँगा ।४४। सो आप प्रसन्न हो जाइए और उनके स्वर्ग में गमन करने का कारण बता दीजिए । जिसके करने से उनका कोप की अग्नि से उद्धार हो जावे ।४५। इसके अनन्तर योगीन्द्र प्रसन्न चित्त से उससे बोले—हे वत्स ! उनका नरक से उद्धार तुम्हारे द्वारा नहीं किया जा सकता है ।४६। पाप कर्मों के करने वालों को तब तक नरक में वास करना ही होगा । उस समय की प्रतीक्षा करो जब तक तुम्हारे यहाँ पौत्र जन्म ग्रहण करे ।४७। कुछ काल के पश्चात् हे वत्स ! तुम्हारा एक महामति पौत्र होगा । उसका शुभ नाम राजा भगीरथ होगा जो समस्त धर्मों के