संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआभूत संप्लव वर्णन ] [ ७५
आपके सामने अब सभी कुछ यथार्थता से वर्णन करूंगा। हे श्रेष्ठ मुनि- गणो ! अब मैं इस चतुर्थ पाद का संहार के सहित वर्णन करता हूँ ।५। वर्त्तमान में महात्मा वैवस्वत मनु का भी जो निसर्ग है उसका भी वर्णन विस्तार के साथ आरम्भ से अन्त तक क्रम से करूँगा । आप लोग इस सबका श्रवण करिए ।६। हे द्विजो ! सभी मन्वन्तरों का संक्षेप जो भी भविष्य में होने वाले सात मन्वन्तर हैं उनके ही साथ में वर्णन करूँगा और लोकों का जो प्रलय होगा उसको भी बतलाऊँगा । बता देने वाले मुझसे यह सभी भली भाँति समझ लीजिए ।७।
एतान्युक्तानि वै सम्यक्सप्तसप्त सु वै प्रजाः । मन्वंतराणि संक्षेपाच्छृणुतानागतानि मे ॥८ सावर्णस्य प्रवक्ष्यामि मनोर्वैवस्वतस्य ह । भविष्यस्य भविष्यं तु समासात्तन्निबोधत ॥९ अनागताश्च सप्तैव स्मृतास्त्विह महर्षयः । कौशिको गालवश्चैव जामदग्न्यश्च भार्गवः ॥१० द्वैपायनो वसिष्ठश्च कृपः शारद्वतस्तथा । आत्रेयो दीप्तिमांश्चैव ऋष्यशृंगस्तु काश्यपः ॥११ भरद्वाजस्तथा द्रौणिरश्वत्थामा महायशाः । एते सप्त महात्मानो भविष्याः परमर्षयः । सुतपाश्चामिताभाश्च सुखाश्चैव गणास्त्रयः ॥१२ तेषां गणस्तु देवानामकेको विंशकः स्मृतः । नामतस्तु प्रवक्ष्यामि निबोधध्वं समाहितः ॥१३ ऋतुस्तपश्च शुक्रश्च कृतिर्नेमिः प्रभाकरः । प्रभासो मासकृद्धर्मस्तेजोरश्मिः क्रतुविराट् ॥१४
ये सात मन्वन्तर तो मैंने आपको बता दिये हैं और भली भाँति कह कर सुना दिये हैं । अब प्रजा सातों में जो होगी वे अनागत मन्वन्तर जो आगे आने वाले हैं उनको संक्षेप से बतलाता हूँ । आप लोग श्रवण कीजिए ।८। अब सावर्ण वैवस्वत मनु के विषय में बताऊंगा । यह भविष्य में होने