संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें७६ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण
वाला है। इसका भविष्य मैं संक्षेप से कहूँगा । आप लोग समझ लीजिए ।६। जो अभी तक नहीं हुए हैं वे सब सात ही महर्षिगण कहे गये हैं । उनके परम शुभ नाम ये हैं—कौशिक—गालव—जामदग्न्य—भागंव—द्वैपायन—वसिष्ठ—कृप—शारद्वत—आत्रेय—दीप्तिवान्—ऋष्यशृंग—काश्यप–भरद्वाज—द्रौणि—महायशस्वी अश्वत्थामा—ये सात महान् आत्मा वाले परमर्षिगण आगे होने वाले हैं । वे सब सुन्दर तप वाले—अपरिमित आभा से सुसम्पन्न और सुखद तीस गण हैं ।१०-१२। उन देवों का गण एक-एक विंशक कहा गया है। मैं अब उनके नाम बताते हुए कहूँगा । आप लोग बहुत ही सावधान होकर उनका श्रवण कीजिए और भली भाँति समझ लीजिए ।१३। क्रतु–तप–शुक्र–कृति–नेति–प्रभाकर–प्रभास–मासकृत्–धर्म–तेजोरश्मि–ऋतु–विराट् ।१४।
अर्चिष्मान् द्योतनो भानुर्यशः कीर्त्तिर्बुधो धृतिः ॥१५
विंशतिः सुतपा ह्येते नामभिः परिकीर्त्तिताः ।
प्रभुर्विभुर्विभासश्च जेता हंतारिहा ऋतुः ॥१६
सुमतिः प्रमतिर्दीप्तिः समाख्यातो महो महान् ।
देही मुनिरिनः पोष्टा समः सत्यश्च विश्रुतः ॥१७
इत्येते ह्यमिताभास्तु विंशतिः परिकीर्त्तिताः ।
दामो दानी ऋतः सोमो वित्तं वैद्यो यमो निधिः ॥१८
होमो हव्यं हुतं दानं देयं दाता तपः शमः ।
ध्रुवं स्थानं विधानं च नियमश्चेति विंशतिः ॥१६.
सुखा ह्येते समाख्याताः सावर्ये प्रथमेंतरे ।
मारीचस्यैव ते पुत्राः कश्यपस्य महात्मनः ॥२०
सांप्रतस्य भविष्यन्ति षष्टिर्देवास्तदन्तरे ।
सावर्णस्य मनोः पुत्रा भविष्यंति नवैव तु ॥२१
अर्चिष्मान्—द्योतन–भानु–यश कीर्ति–बुध–धृति–।१५। ये सुन्दर तपों वाले हैं । इनकी विंशति है जो नाम बताकर कीर्त्तित कर दिये गये हैं । प्रभु–विभु–विभास–जेता–हंता–रिहा–ऋतु. ।१६। सुमति–प्रमति–दीप्ति और महान् मह समाख्यात हुआ है । देही–मुनि–इन–पोष्टा–सम–सत्य–विश्रुत ।१७।