संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआभूत संप्लव वर्णन ] [ ७७
ये सब अमित आभा से सम्पन्न थे। इनकी भी विंशति कही गयी है अर्थात् इन बीसों का समुदाय बताया गया है। अब अन्य विंशति भी बतायी जाती है—दम-दानो-ऋत-सोम-वेद्यायम-निधि-होम-हव्य-हुत-दान-देय-दाता-तप-शम-ध्रुव-स्थान-विधान और नियम—ये विंशति होती हैं। १८-१९। ये सब सावर्ण्य मन्वन्तर में सुख बताये गये हैं। वे सब मारीच काश्यप के ही पुत्र हैं जो महान् आत्मा वाले थे। २०। इसके अन्तर में वर्त्तमान् काल के साठ देवता होंगे। सावर्णि मनु के पुत्र तो नौ ही होंगे। २१।
विरजाश्चार्वरीवांश्च निर्मोकाद्यास्तथा परे ।
नव चान्येषु वक्ष्यामि सावर्णेष्वांतरेषु वै ॥२२
सावर्णमनवश्चान्ये भविष्या ब्रह्मणः सुताः ।
मेरुसावर्णितस्ते वै चत्वारो दिव्यदृष्टयः ॥२३
दक्षस्य ते हि दौहित्राः क्रियाया दुहितुः सुताः ।
महता तपसा युक्ता मेरुपृष्ठे महौजसः ॥२४
ब्रह्मादिभिस्ते जनिता दक्षेणैव च धीमता ।
महर्लोकं गता वृत्ता भविष्या मेरुमाश्रिताः ॥२५
महानुभावास्ते पूर्वं जज्ञिरे चाक्षुषेंतरे ।
जज्ञिरे मनवस्ते हि भविष्यानागतांतरे ॥२६
प्राचेतसस्य दक्षस्य दौहित्रा मनवस्तु ये ।
सावर्णा नामतः पंच चत्वारः परमर्षिजाः ॥२७
संज्ञापुत्रस्तु सावर्णिरेको वैवस्वतस्तथा ।
ज्येष्ठः संज्ञासुतो नाम मनुर्वैवस्वतः प्रभुः ॥२८
विरजा-वार्वरीवान् तथा दूसरे निर्मोक आद्य अन्य सावर्ण अन्तरों में नौ बतलाऊँगा। २२। अन्य सावर्ण मनु ब्रह्माजी के पुत्र होने वाले हैं। वे मेरु सावर्णि से लेकर चार दिव्य दृष्टि वाले हैं। २३। वे सब प्रजापति दक्ष के दौहित्र हैं और क्रिया नाम वाली उसकी दुहिता के पुत्र हैं। ये सब महान् तप से युक्त थे। २४। वे सब ब्रह्मादि के द्वारा तथा धीमान् दक्ष के द्वारा जनित हुए हैं। महर्लोक को गये थे और वृत्त भविष्य मेरु पर्वत पर समाश्रित थे। २५। वे महानुभाव पूर्व में समुत्पन्न हुए थे। जिस समय में चाक्षुष