संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें८२ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण
में विवस्वत के दो मनु उत्पन्न हुए थे ।५१। और जो वैवस्वत मन था और जो सावर्ण नाम से विश्रुत था । प्रभु वैवस्वत मनु संज्ञा का ही पुत्र जानना चाहिए । यह पर विद्वान् थे ।५२। सवर्णा का अन्य सुत था वैवस्वत मनु कहा गया है । और जो सावर्ण मनु हैं वे चार महर्षियों से जन्म ग्रहण वाले हैं ।५३। वे निश्चित रूप से तपश्चर्या से सम्भृत आत्माओं वाले हुए थे और अपने मन्वन्तरों में ही हुए थे । आगे होने वालों में सभी कार्यों के अर्थों का साधन करने वाले होंगे ।५४। प्रथम मेरु सावर्ण में दक्ष प्रजापति के पुत्र मनु के मश मरीचि गर्भ और सुधर्माण ये तीन थे । वे सब महान् आत्माओं वाले वैवस्वत मन्वन्तर में समुत्पन्न हुए थे ।५५। वे दक्ष के पुत्र प्रजापति रोहित के पुत्र थे । जो आगे होने वाले हैं वे होंगे । एक-एक द्वादश गण हैं ।५६।
ऐश्वरश्च ग्रहो राहुर्वाकुर्वंशस्तथैव च ।
पारा द्वादश विज्ञेया उत्तरांस्तु निबोधत ॥५७
वाजिपो वाजिजिच्चैव प्रभृतिश्च ककुद्यथ ।
दधिकावा विषक्वश्च प्रणीतो विजतो मधुः ॥५८
उतथ्योत्तमकौ द्वौ तु द्वादशैते मरीचयः ।
सुधर्माणस्तु वक्ष्यामि नामतस्तान्निबोधत ॥५९
वणस्तथाथगविश्च भुरण्यो ब्रजनोऽमितः ।
अमितो द्रवकेतुश्च जंभोऽथाजस्तु शक्रकः ॥६०
मुनेमिद्युतयश्चैव सुधर्माणः प्रकीर्तिताः ।
तेषामिन्द्रस्तदा भव्यो ह्यद्भुतो नाम नामतः ॥६१
स्कन्दोऽसौ पार्वतीयो वै कार्तिकेयस्तु पावकिः ।
मेधातिथिश्च पौलस्त्यो वसुः काश्यप एव च ॥६२
ज्योतिष्मान्भागंवश्चैव द्युतिमानंगिरास्तथा ।
वसिष्ठश्चैव वासिष्ठ आत्रेयो हव्यवाहनः ॥६३
ऐश्वर-ग्रह-राहु-वाकु-वंश- ये पारा बारह हैं जो जान लेने चाहिए । अब उत्तर जो हैं उनको भी जान लो ।५७। वाजिप-वाजिजित्-प्रभूति- ककुदी-दधिकावा-प्रणीत-विजय-मधु-उतथ्य-उत्तमक ये दो हैं—ये द्वादश