संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआभूत संप्लव वर्णन ] [ ८३
मरीचि हैं। सुधर्माण को बतलाऊंगा। उनको नाम से समझ लो ।६८-६६। वर्ण अवगन्धी-भूरण्य-व्रजन-अभित-द्रवकेतु-जम्भ-आज-शक्रक-सुनेमि-द्युतय— ये सब सुधर्माण कीत्तित किये गये हैं। उस समय में उनका जो होने वाला इन्द्र है उसका नाम अद्भुत है ।६०-६१। स्कन्द-पार्वतीय-कार्तिकेय-पावकि- मेधातिथि-पौलस्त्य-वसु-काश्यप।६२। ज्योतिष्मान्-भार्गव-द्युतिमान्-अङ्गिरा वसिन-वासिष्ठ-आत्रेय-हव्य वाहन ।६३।
सुतपाः पौलहश्चैव सप्तैते रोहितेतरे । धृतिकेतुर्दीप्तिकेतुः झापहस्तनिरामयाः ॥६४ पृथुश्रवास्तथाऽनीको भूरिद्युम्नो बृहद्यशः । प्रथमस्य तु सावर्णैनैव पुत्राः प्रकीर्तिताः ॥६५ दशमे त्वथ पर्याये धर्मपुत्रस्य वै मनोः । द्वितीयस्य तु सावर्णैर्भाविष्यस्यांतरे मनोः ॥६६ सुधमानो विरुद्धाश्च द्वावेव तु गणौ स्मृतौ । दीप्तिमन्तश्च ते सर्वे शतसंख्याश्च ते समाः ॥६७ प्राणानां यच्छतं प्रोक्तं ऋषिभिः पुरुषेति वै । देवास्ते वै भविष्यन्ति धर्मपुत्रस्य वै मनोः ॥६८ तेषामिन्द्रस्तथा विद्वान्भविष्यः शांतिरुच्यते । हविष्मान्पौलहः श्रीमान्सुकीर्तिश्चाथ भार्गवः ॥६६ आपोमूर्तिस्तथात्रेयो वसिष्ठश्चापवः स्मृतः । पौलस्त्योऽप्रतिमश्चापि नाभागश्चैव काश्यपः ॥७०
सुतपा-पौलह—ये सात रोहितेतर हैं। धृतिकेतु-दीप्तिकेतु-ज्ञाप-हस्त निरामय ।६४। पृथुश्रवा-अनीक-भूरिद्युम्न-बृहद्यश—ये प्रथम सावर्णि के नौ पुत्र बताये गये हैं ।६५। इसके अनन्तर दशम पर्याय में धर्म के पुत्र द्वितीय सावर्णि मनु के जो आगे होने वाला है उस मनु के अन्तर में ।६५। सुधामान और विरुद्ध—ये दो ही गण कहे गये हैं। वे सभी दीप्तिमान् थे और वे सम शत संख्या वाले थे ।६७। ऋषियों ने प्राणों के शत को पुरुष—यह कहा है। वे धर्म के पुत्र मनु के देवगण होंगे ।६८। उनका इन्द्र भविष्य विद्वान् हैं और