संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदण्डनाथा श्यामला सेना यात्रा ] [ २३५
अथारुह्य समुत्तुंगध्वजचक्रं महारथम् । बालार्कवर्णकवचा मदालोलविलोचना ॥२८
इसके उपरान्त संकेत योगिनी की मन्त्र नाथा चरणों के स्पर्श करने वाली तथा निर्याण की सूचना करने वाली दिवलोक में काहली बजी थी। ।२२। शृङ्गार प्राय भूषा वाली—शार्दूल श्यामल कान्ति वाली—वीणा से संयत करों वाली शक्तियों की सेना निकल गयी थी ।२३। उनमें कुछ तो गान करती हैं जिनकी ध्वनि मत्त कोकिलों के समान थी—कुछ नृत्य करती हैं। वीणा-वेणु और मृदंग आदि लिये हुई थीं और उनका चरणों का विन्यास का क्रम विलास से युक्त था ।२४। जगत के जनों को हर्षित करती हुई श्यामा शक्तियां वहां से चल दी थीं। कुछ का वाहन मयूर था और कुछ हंसों को वाहन बनाये हुई थीं ।२५। कुछ नकुल पर समारूढ़ थीं और कुछ कोकिलों पर विराजमान थीं। ये सभी श्यामल आकार वाली थी। इनमें कुछ कर्णी रथों पर सब संस्थित थीं ।२६। ये कादम्ब मधु मत्ता थीं और कुछ सैन्धवों पर समारूढ़ थीं। मन्त्रनाथ को अपने आगे करके ही वहाँ से रवाना हो गयीं थीं ।२७। इसके उपरान्त समुत्तुंगध्वजा वाले रथ पर आरूढ़ होकर बाल सूर्य के वर्ण के समान कवच वाली तथा मद से आलोल लोचनों वाली थी ।२८।
ईषत्प्रस्वेदकणिकामनोहरमुखांबुजा । प्रेक्षयंती कटाक्षौघैः किंचिद्भ्रू वल्लितांडवैः ॥२९
समस्तमपि तत्सैन्यं शक्तीनामुद्धतोद्धतम् । पिच्छत्रिकोणच्छत्रेण विरुदेन महीयसा ॥३०
आसां मध्ये न चान्यासां शक्तीनाभुज्ज्वलोदया । निर्जगाम घनश्यामश्यामला मन्त्रनायिका ॥३१
तां तुष्टुवुः षोडशभिर्नामभिर्नाकवासिनः । तानि षोडशनामानि शृणु कुम्भसमुद्भव ॥३२
संगीतयोगिनी श्यामा श्यामला मन्त्रनायिका । मन्त्रिणी सचिवेशी च प्रधानेशी शुकप्रिया ॥३३
वीणावती वैणिकी च मुद्रिणी प्रियकप्रिया । नीपप्रिया कदंबेशी कदंबवनवासिनी ॥३४