भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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२३६ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

सदामदा च नामानि षोडशैतानि कुम्भज । एतैयैः सचिवेशानीं सकृत्स्तौति शरीरवान् । तस्य त्रैलोक्यमखिलं हस्ते तिष्ठत्यसंशयम् ॥३५

थोड़ी २ प्रस्वेद की कणिकाओं से मनोहर मुख कमल वाली-कुछ भ्रुकुटियों को नचाकर कटाक्ष पातोंसे प्रेक्षण करती हुईथीं।२९। उन शक्तियों का सम्पूर्णउद्धत भी उद्धत सैन्यबल था जो पिच्छ त्रिकोण महान् विरुद वाले छत्र से संयुत था ।३०। इनके और अन्यों के मध्य में अर्थात् शक्तियों के बीच में उज्ज्वल उदय वाली-घन के समान श्यामला मन्त्र नायिका निकली थी । ।३१। स्वर्गवासियों ने उसका भी सोलह नामों के द्वारा स्तवन किया था । हे कुम्भोद्भव ! उन सोलह नामों का भी अब मुझसे श्रवण कर लो ।३२। संगीत योगिनी-श्यामा-श्यामल-मन्त्र नायिका—मन्त्रिणी—सचिवेशी—प्रधानेशी—शुक प्रिया—वीणावती—वैणिकी-मुद्रिणी--प्रियकप्रिया—नीप प्रिया—कदम्बेशी—कदम्ब वन वासिनी-सदामदा-हे कुम्भज ! ये ही सोलह नाम हैं। इनके द्वारा जो सदा शरीरधारी एक बार सचिवेशानी की स्तुति किया करता है उसके हाथ में सम्पूर्ण त्रैलोक्य निःसंशय स्थित रहा करता है ।३३-३५।

मन्त्रिनाथा यत्र यत्र कटाक्षं विकिरत्यसौ । तत्र तत्र गताशंकं शत्रुसैन्यं पतत्यलम् ॥३६ ललितापरमेशान्या राज्यचर्चा तु यावती । शक्तीनामपि चर्चा या सा सर्वत्र जयप्रदा ॥३७ अथ संगीतयोगिन्याः करस्थाच्छुकपोतकात् । निर्जगाम धनुर्वेदो वहन्सज्जं शरासनम् ॥३८ चतुर्बाहुयुतो वीरस्त्रिशिरास्त्रिविलोचनः । नमस्कृत्य प्रधानेशीमिदमाह स भक्तिमान् ॥३६ देवि भंडासुरेंद्रस्य युद्धाय त्वं प्रवर्त्तसे । अतस्तव मया साह्यं कर्तव्यं मन्त्रिनायिके ॥४० चित्रजीवमिमं नाम कोदण्डं सुमहत्तरम् । गृहाण जगतामंब दानवानां निबर्हणम् ॥४१