भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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बलाहकादि सप्त सेनापति वध वर्णन ] [ ३२५

रण करके वह संहार गुप्त महागिद्ध था जिसके बहुत क्रूर नेत्र थे। रण में धनुष को खींचकर बलाहक को बहुत ऊँचा उठा लिया था।४१-४२।

बलाहको वपुर्धुन्वन्गृध्रपृष्ठकृतस्थितिः । सपक्षकूटशैलस्थो बलाहक इवाभवत् ॥४३ सूचीमुखश्च दैत्येन्द्र सूचीनिष्ठुरपक्षतिम् । काकवाहनमारुह्य कठिनं समरं व्यधात् ॥४४ मत्तः पर्वतशृङ्गाभश्चंचूदण्डं समुद्वहन् । कालदण्ड प्रमाणेन जंघाकाण्डेन भीषणः ॥४५ पुष्करावर्तकसमा जंबालसदृशद्युतिः । क्रोशगात्रायतौ पक्षावुभावपि समुद्वहन् ॥४६ सूचीमुखाधिष्ठितोऽसौ करटः कटुवासितः । मर्दयंश्चञ्चुघातेन शक्तीनां मण्डलं महत् ॥४७ अथो फलमुखः फालं गृहीत्वा निजमायुधम् । कंकमारुह्य समरे चकाशि गिरिसन्निभम् ॥४८ विकर्णाख्यश्च दैत्येन्द्रश्चमूर्भर्ता महाबलः । भेरूंढपतनारूढः प्रचंडयुद्धमातनोत् ॥४९

एक गिद्ध की पीठ पर स्थिति करने वाला बलाहक शरीर को विधूनित करता हुआ सपक्ष कूट शैल पर स्थित बलाहक के ही समान हो गया था ।४३। और सूची मुख दैत्येन्द्र सूची के तुल्य निष्ठुर पंखों वाले काक वाहन पर समारूढ़ हुआ था और उसने बड़ा ही कठोर युद्ध किया था ।४४। वह मत्त था और पर्वत की चोटी की भांति उसकी आभा थी—वह चञ्चु दंड का उद्वहन कर रहा था। वह कालदंड के प्रमाण वाले जंघा कांड से बहुत ही भीषण दिखाई दे रहा था ।४५। जंबाल के सदृश द्युति वाला पुष्करावर्तक के समान था। उसके दोनों पंख एक कोश के बराबर आयत थे। ऐसे पंखों का उद्वहन कर रहा था ।४६। सूची मुख पर अधिष्ठित कटुवासित करट शक्तियों के महान् मंडल को चोंच के आघात से विमर्दन कर रहा था ।४७। इसके अनन्तर फलमुख अपने आयुध काल को ग्रहण करके कंक पर समारूढ़ हुआ था और पर्वत की भांति प्रकाशित हो रहा था। विकर्ण