भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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३२६ ] [ ब्रह्माण्ड पुराण

नामक दैत्येन्द्र सेनापति महान् बलवान् था । उसने भेरुण्ड पतन पर समारोहण करके बड़ा भारी युद्ध किया था ।४८-४९।

विकटानननामानं विलसत्पट्टिशायुधम् । उवाह समरे चण्डः कुक्कुटोऽतिभयङ्करः ॥५० गर्जन्कण्ठस्थरोमाणि हर्षयञ्ज्वलदीक्षणः । पश्यन्पुरः शक्तिसैन्यं चचाल चरणायुधः ॥५१ करालाक्षश्च भूभर्ता षष्ठोऽन्तन्तगरिष्ठदः । वज्रनिष्ठुरघोषश्च प्राचलत्प्रेतवाहनः ॥५२ श्मशानमन्त्रशूरेण तेन संसाधितः पुरा । प्रेतो भूतोसमाविष्टस्तमुवाह रणाजिरे ॥५३ अवाङ्मुखो दीर्घबाहुः प्रसारितपदद्वयः । प्रेतो वापनतां प्राप्तः करालाक्षनथावहत् ॥५४ अन्यः करटको नाम दैत्यसेनाशिखामणिः । मर्दयामासशक्तीनां सैन्यं वेतालवाहनः ॥५५ योजनायतमूर्तिः सन्वेतालः क्रूरलोचनः । श्मशानभूमौ वेतालो मंत्रेणानेन साधितः ॥५६

अतीव भयङ्कर प्रचण्ड कुक्कुट ने पट्टिश नामक आयुध को ग्रहण करने वाले विकटानन नाम वाले का वहन किया था ।५०। कंठ में रहने वाले रोमों को हर्षित करता हुआ और गर्जना करता हुआ वह शक्ति की सेना को देख रहा था तथा उसके नेत्र जाज्वल्यमान थे ऐसा चरणायुध वहाँ से चल दिया था ।५१। करालाक्ष नामक राजा जो छठवां था वह अत्यधिक गरिष्ठद था । वज्र के समान ही उसका घोष निष्ठुर था और प्रेत के वाहन वाला था । वह भी चल दिया था ।५२। उसने पहिले ही श्मशान मन्त्र शूर ने उसको संसाधित कर लिया था । ऐसे भूत समाविष्ट प्रेत ने रण में उसका वहन किया था । नीचे की ओर मुख वाले—लम्बी भुजा वाले—दोनों पैरों को फैलाये हुए प्रेत के वाहनता को प्राप्त करके कुटिलाक्ष रवाना हुआ था ।५३-५४। अन्य जो करट नामक दैत्यों की सेना का स्वामी था वह वेताल के वाहन वाला था और शक्ति की सेना का मर्दन किया था ।५५। वह एक