संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
पृष्ठ 745, कुल 893 में से
संदर्भ में पढ़ेंपिषंग पलायन वर्णन ] [ ३३५
करते हैं । ऐसे हमारा भी इस समय में विपरीत समय उपस्थित हो गया है ।६। यह होनहार ऐसी बलवान है कि यह बलवान को क्लीव (नपुंसक) और धनवान को भी धनहीन कर दिया करती है। जो दीर्घ आयु वाला है उसको आयुहीन कर दिया करती है। इस होनी का प्रहार बड़ा ही कठिन है ।७।
क्व सत्वमस्मद्बाहूनां क्वेयं दुर्ललिता वधूः ।
अकांड एव विधिना कृतोऽयं निष्ठुरो विधिः ॥८
सर्पिणीमाययोदग्रास्तया दुर्घटशौर्यया ।
अधिसंग्रामभूचक्रे सेनान्यो विनिपातिताः ॥६
एवमुद्दामदर्पाढया वनिता कापि मायिनी ।
यदि संप्रहरत्यस्मान्धिग्बलं नो भुजार्जितम् ॥१०
इमं प्रसंगं वक्तुं च जिह्वा जिह्वेति मामकी ।
वनिता किमु मत्सैन्यं मर्दयिष्यति दुर्मदा ॥११
तदद्य मूलच्छेदाय तस्या यत्नो विधीयताम् ।
मया चारमुखाज्ज्ञाता तस्या वृत्तिर्महाबला ॥१२
सर्वेषामपि सैन्यानां पश्चादेवावतिष्ठते ।
अग्रतश्चलितं सैन्यं पयहस्तिरथादिकम् ॥१३
अस्मिन्नेव ह्यवसरे पार्ष्णिग्राहो विधीयताम् ।
पार्ष्णिग्राहमिमं कर्तुं विषण्णश्चतुरो भवेत् ॥१४
हमारी भुजाओं का बल तो कहाँ अर्थात् उस कितना विशाल है और यह दुर्ललिता वधू कहाँ है अर्थात् नारी की शक्ति हमारे सामने सर्वथा तुच्छ है। अनवसर में ही विधाता के ऐसा निष्ठुर विधान कर दिया है कि हमारा विनाश इन अबला नारियों द्वारा हो रहा है ।८। दुर्घट शूरता वाली सर्पिणी माया के द्वारा बड़े-बड़े उदग्र सेनानी गण संग्राम भूमि में मारे गये हैं ।६। इस रीति से उद्दाम दर्प से संयुत कोई माया वाली नारी यदि हमारा संहार कर देती है तो हमारी बाहुओं के द्वारा जो भी बल अर्जित किया गया है उसको धिक्कार ही है ।१०। इस प्रसङ्ग को कहने में भी मेरी जिह्वा लज्जित होती है । क्या यह दुर्मदा स्त्री हमारी सेना का मर्दन कर देगी