संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविषंग पलायन वर्णन ] [ ३३७
स्वरूपा है। उसके समूल विनाश से ही सम्पूर्ण शक्तियों का समुदाय विनष्ट हो जायगा।२०। जिस प्रकार से सरोजिनी के कन्द के उच्छेदन करने पर जल में उसके दलों का विनाश हो जाया करता है। सबके पीछे ही जो एक बड़ा भासुर रथ चला करता है।२१।
दशयोजनसंपन्ननिजदेहसमुच्छ्रयः ।
महामुक्तातपत्रेण सर्वोर्द्ध्वं परिशोभितः ॥२२
वहन्मुहुर्वीज्यमानं चामराणां चतुष्टयम् ।
उत्तुंगकेतुसंघातलिखितांबुदमंडलः ॥२३
तस्मिन्न्थे समायाति सा दृष्टा हरिणेक्षणा ।
निभृतं संनिपत्य त्वं चिह्नानेन लक्षिताम् ॥२४
तां विजित्य दुराचारां केशेष्वाकृष्य मर्दय ।
पुरतश्चलिने सैन्ये सत्त्वशालिनि सा वधूः ॥२५
स्त्रीमात्ररक्षा भवतो वशमेष्यति सत्वरम् ।
भवत्सहायभूतायां सेनेन्द्राणामिहाभिधा ॥२६
शृणु यैर्भवतो युद्धे साह्यंकार्यमतन्द्रितैः ।
आद्यो मदनको नाम दीर्घजिह्वो द्वितीयकः ॥२७
हुवको हुलुमुलूश्च कवलसः कक्किवाहनः ।
थुक्लसः पुण्ड्रकेतुश्च चंडबाहुश्च कुक्कुरः ॥२८
वह रथ दशयोजन से सम्पन्न अपने कलेवर की ऊँचाई वाला है। सबके ऊपर एक छत्र पर रहा करता है जो बड़े-बड़े मुक्ताओं से विनिर्मित है और परिशोभित है ।२२। वह चार चमरों के द्वारा बार-बार वीज्यमान रहता है अर्थात् चार चमर उस पर ढुलाये जाया करते हैं। उस पर एक बहुत ऊँची ध्वजा टंगी रहा करती है जो अम्बुदों के मंडल तक पहुँचती है ।२३। ऐसे ही उस रथ पर वह हरिण के समान सुन्दर नेत्रों वाली आया करती है । तुम चुपचाप इसी चिह्न से उसको लक्षित कर लेना और उस पर धावा करके उस दुराचारिणी को जीतकर उसके केश खींचकर मर्दन करना। आगे सत्त्वशाली सेना चलने पर वह वधू स्त्रियों के ही द्वारा रक्षित है ।२४-२५। अतः आपके वश में शीघ्र ही आ जायगी। आपकी सहायता