भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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गणनाथ पराक्रम वर्णन ] [ ३७६

आलस्य रहित होगयीं थीं और शस्त्र हाथों में लेकर युद्ध करने के लिए उद्यत हो गयी थीं ।७६। उस दन्ति वदन ने जिनके कलित कण्ठ की ध्वनि हो रही थी एक जप यन्त्र का सृजन किया था और रात्रि में विनाश कर दिया था जो बाधक था ।७७।

इमं वृत्तांतमाकर्ण्य भंडः स क्षोभमाययौ ।
ससर्ज च बहूनात्मरूपान्दंतावलाननान् ॥७८
ते कटक्रोडविगलन्मदसौरभचञ्चलैः ।
चञ्चरीककुलैरग्रे गीयमानमहोदयाः ॥७९
स्फुरद्दाडिमकिंजल्कविक्षेपकररोचिषः ।
सदा रत्नाकरानेकहेलया पातुमुद्यताः ॥८०
आमोदप्रमुखा ऋद्धिमुख्यशक्तिनिषेविताः ।
आमोदश्च प्रमोदश्च सुमुखो दुर्मुखस्तथा ॥८१
अरिघ्नो विघ्नकर्त्ता च षडेते विघ्ननायकाः ।
ते सप्तकोटिसंख्यानां हेरंबानामधीश्वराः ॥८२
ते पुरश्चलितास्तस्य महागणपते रणे ।
अग्निप्राकारवलयाद्विनिर्गत्य गजाननाः ॥८३
क्रोधहुंकारतुमूलाः प्रत्यपद्यंत दानवान् ।
पुनः प्रचण्डफूत्कारबधिरीकृतविष्टपाः ॥८४

इस वृत्तान्त को श्रवण करके भण्ड को बड़ा भारी क्षोभ हुआ था कि जिसने (गणपति ने) अपने ही समान बहुत से दन्तावलानानों का सृजन किया था ।७८। उनके कटस्थल से मद निकल रहा था और उसकी गन्ध से चञ्चल भ्रमरों के समूह आगे मंडरा रहे थे जो गान सा हो रहा था ।७९। उनकी कान्ति स्फुरित दड़िम के किंजल्क के विक्षेपकर रोचि वाले थे जो सदा ही अनेक सागरों को एक ही बार में पान करने के लिए उद्यत थे ।८०। उनमें आमोद प्रमुख था और ऋद्धि जिनमें मुख्य थी ऐसी शक्तियों के द्वारा सेवित थे । ये छै विघ्न नायक हैं और सात करोड़ संख्या वाले हेरम्बों के अधीश्वर थे । इनके नाम—आमोद—प्रमोद—सुमुख—दुर्मुख—अरिघ्न और विघ्न कर्त्ता ये थे ।८१-८२। ये सब उन महा गणपति के युद्ध में आगे चल दिये थे।