संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)
Brahmanda Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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॥ भंडासुर वध वर्णन ॥
अगस्त्य उवाच- अश्वानन महाप्राज्ञ वर्णितं मन्त्रिणीबलम् । विषंगस्य वधो युद्धे वर्णितो दण्डनाथया ॥१॥ श्रीदेव्याः श्रोतुमिच्छामि रणचक्रे पराक्रमम् । सोदरस्यापदं दृष्ट्वा भण्डः किमकरोच्छ्रुचा ॥२॥ कथं तस्य रणोत्साहः कैः समं समयुध्यत । सहायाः केऽभवंस्तस्य हतभ्रातृतनूभुवः ॥३॥ हयग्रीव उवाच- इदं शृणु महाप्राज्ञ सर्वपापनिकृन्तनम् । ललिताचरितं पुण्यमणिमादिगुणप्रदम् ॥४॥ वैषुवायनकालेषु पुण्येषु समयेषु च । सिद्धिदं सर्वपापघ्नं कीर्तिदं पञ्चपर्वसु ॥५॥ तदा हतौ रणे तत्र श्रुत्वा निजसहोदरौ । शोकेन महताविष्टो भण्डः प्रविललाप सः ॥६॥ विकीर्णकेशो धरणी मूच्छितः पतितस्तदा । न लेभे किञ्चिदाश्वासं भ्रातृव्यसनकर्शितः ॥७॥
अगस्त्यजी ने कहा—हे महाप्राज्ञ ! हे अश्वानन ! आपने मन्त्रिणी के बल का वर्णन कर दिया है और दण्डनाथा ने युद्ध में विषंग वध किया था वह भी वर्णन कर दिया है ।१। अब मैं युद्ध में श्रीदेवी के पराक्रम के श्रवण करने की इच्छा करता हूँ और भण्ड ने भाई के हनन को सुनकर शोक से क्या किया था ? फिर उसका रण में उत्साह कैसे हुआ था और उसने किनके साथ युद्ध किया था । जब उसके भाई पुत्र मर गये तो फिर उसके सहायक कौन हुए थे ।२-३। हयग्रीवजी ने कहा—हे महाप्राज्ञ ! अब यह भी आप सुनिए जो कि सब पापों का छेदन करने वाला है। यह श्री ललिता देवी का चरित परम पुण्यमय है और अणिमादिक आठों महा-