भारतकोश
संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

संक्षिप्त ब्रह्माण्ड पुराण (खण्ड १ व २)

Brahmanda Purana

महर्षि वेदव्यास द्वारा

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भारतदेश ] [ ६३

सनेरुजा शुक्तिमती मंकुती त्रिदिवा क्रतुः ॥३१ ऋक्षवत्संप्रसूतास्ता नद्यो मणिजलाः शिवाः । तापी पयोष्णी निर्विन्ध्या सृपा च निषधा नदी ॥३२ वेणी वैतरणी चैव क्षिप्रा वाला कुमुद्वती । तोया चैव महागौरी दुर्गा वान्तशिला तथा ॥३३ विन्ध्यपादप्रसूतास्ता नद्यः पुण्यजलाः शुभाः । गोदावरी भीमरथी कृष्णवेणाथ मंजुला ॥३४ तुंगभद्रा सुप्रयोगा बाह्या कावेर्यथापि च । दक्षिणप्रवहा नद्यः सह्यपादाद्विनिः स्मृताः ॥३५

क्षिप्रा और अवन्ति ये नदियां पारियात्र के समाश्रय वाली हैं—ऐसा कहा गया है—शोण महानन्द हैं। सुरसा—नर्मदा—क्रिया—मन्दाकिनी दशार्णा—चित्रकूटा—तमसा—पिप्पला—श्येना—करमोदा और पिशाचिका—ये नदियाँ हैं ।२९-३०। चित्रोत्पला—विशाला—मंजुला—वास्तुवाहिनी—सनेरुजा—शुक्तिमती—मंकुती—त्रिदिवा—ऋतु नदियां हैं ।३१। ये सब ऋक्ष वत्स पर्वत से संभूत होने वाली हैं जिनका जल मणि के समान परम स्वच्छ और शिव है । तापी—पयोष्णी—निर्विन्ध्या—सृपा और निषधा नदी हैं ।३२। वेणी—वैतरणी—वाला—कुमुद्वती—तोया—महागौरी—दुर्गा—वान्तशिला नदियाँ हैं ।३३। ये सब नदियां विन्ध्य गिरि के पाद से प्रसूत होने वाली हैं जिनका जल परम पुण्यमय ह और जो बहुत ही शुभ है । गोदावरी-भीमरथी-कृष्णवेणा-मंजुला-तुङ्गभद्रा-सुप्रयोगा-बाह्या-कावेरी—ये नदियाँ दक्षिणा की ओर प्रवाह करने वाली हैं और सह्य गिरि के पाद से निकलने वाली हैं ।३४-३५।

कृतमाला ताम्रपर्णी पुष्पजात्युत्पलावती । नद्योऽभिजाता मलयात्सर्वाः शीतजलाः शुभाः ॥३६ त्रिसामा ऋषिकुल्या च मंजुला त्रिदिवाबला । लांगूलिनी वंशधरा महेन्द्रतनयाः स्मृताः ॥३७ ऋषिकुल्या कुमारी च मंदगा मंदगामिनी । कृपा पलाशिनी चैव शुक्तिमत्प्रभवाः स्मृताः ॥३८