भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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ब्राह्मस्फुटसिद्धान्तोत्तरार्धे परिकर्मविंशतिः (सङ्कलितम्, व्यवकलितम्, प्रत्युत्पन्नो गुणनम्, भागहारः, वर्गः, वर्गमूलम्, घनः, घनमूनम् । पञ्चजातयः, त्रैराशिकम्, व्यस्तत्रैराशिकम्, पञ्चराशिकम्, सप्तराशिकम्, नवराशिकम्, एका- दशराशिकम्, भाण्डप्रति भाण्डं चेति) कथिताऽस्ति, सर्वत्रैव चतुर्वेदाचार्य्योक्ता उद्देशकाः (उदाहरगानि) सन्ति । सिद्धान्तशेखरेऽपि परिकर्मविंशतिः (अभित्ना- ङ्कानां गुणन-भजन-वर्ग-वर्गमूल-घन-घनमूलानीति षट् ६, भिन्नाङ्कानां योगान्तर- गुणन-भजन-वर्ग-वर्गमूलानीति षट् ६, भाग प्रभाग-भागानुबन्ध-भागापवाहाराख्य- जाति चतुष्टयम् ४, विलोमकर्म १, त्रैराशिकम् १, व्यस्त त्रैगशिकम् १, पञ्च- राशिकम् १, इति ) ब्रह्मगुप्तश्रीपत्युक्त विंशत्यां परिकर्मसु विषयवर्णने महानेव [L1

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