भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

पृष्ठ 388, कुल 737 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 388

( २ ) मासा<sup></sup> द्वादशवर्षं विकलालिप्तांशराशिभगणांतः<sup></sup> क्षेत्रविभागस्तुल्यः कालेन विनाडिकाद्येन<sup></sup> ॥ ६ ॥ स्वचतुष्टयरदवेदा<sup></sup> रविवर्षाणां चतुर्युगं भवति । ४३२००००<sup></sup> सन्ध्या सन्ध्यांशै<sup></sup> सह चत्वारि पृथक्कृतादीनि ॥७॥ युगदशभागो गुणितः कृतं चतुर्भि<sup></sup>स्त्रिभिर्गुणास्त्रेता<sup></sup> । द्विगुणो<sup></sup> द्वापरमेकेन संगुणः कलियुगं भवति ॥ ८ ॥ १७२८०००।१२९६०००।८३४०००<sup></sup>।४३२००० युगपादानार्य<sup></sup>भटश्चत्वारि समानि<sup></sup> कृतयुगादीनि । १०८००००<sup></sup> यदभिहितवान्<sup></sup> न तेषां स्मृत्युक्तसमानमेकमपि<sup></sup> ॥ ६ ॥

६. (ख) १. मास for (मासा)
[L1