भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 390

( ४ ) युग्मन्वन्तरकल्पाः कालपरिच्छेदकाः² स्मृतावुक्ताः । यस्मान्न¹ रोमके ते स्मृति³ बाह्यो रोमकस्तस्मात् ॥ १३ ॥ कालर्क्ष¹देशयोगाद्भू²यो ग्रहमन्दशीघ्रपातानाम्⁵ । कल्पेन यतो योगस्ततः³ स्फुटं ग्रहयुगं⁴ कल्पः ॥ १४ ॥ कल्पेऽर्कबुध¹ सितानां भगणाः⁴ शून्यानि सप्तरदवेदाः । प्राग्व्रजता² कुजगुरुशनिशीघ्रोच्चानां स्वकक्षासु⁵ ॥ १५ ॥ ४३२०००००००³ १३. (घ) १. न रोमके ते (च) न रौनुके ते for (न्न रोमके ते) (ख) २. कलापरिच्छेदकाः for (कालपरिच्छेदकाः) (च) ३. वि० इस प्रति में “……परिच्छे” के पश्चात् लेखक ने भूल से फिर “मनुरेक सप्तति युग” से लिखना आरंभ कर दिया । इस प्रकार ५½ पंक्तियां पुनः लिखी गईं ! उसके पश्चात् फिर क्रमशः लिखता गया । ४. स्मृतबाह्यो for (स्मृतिबाह्यो) १४. (घ) १. कालक्ष्यं (ख) कालक्ष (च) कालक्ष्यं for (कालर्क्ष) २. दूद्भूयो (च) for (द्भूयो) ३. तत (च) for (ततः) ४. ग्रहयुगकल्पः (ग) ग्रहयुतं कल्पः for (ग्रहयुगं कल्पः) (ग) ५. ग्रहशीघ्रमंद पातानां (क) (ख) for (ग्रहमन्द शीघ्रपातानां) (च) ४. ग्रहयुग कल्पः for (ग्रहयुगं कल्प.) १५. (घ) १. बुध (च) for (बुध) २. व्रजनां (ग) व्रजती (ख) व्रजतां for (व्रजता) (क) २. प्राग्व्रजतां for (प्राग्व्रजता) ३. संख्या लुप्त है । टीका में अंकित है । (ख) ४. भगराः for (भगणाः) ५. सा for (सु) (च) स कक्षासु for (स्व कक्षासु)