भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

पृष्ठ 410, कुल 737 में से

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पृष्ठ 410

( २४ ) ऋतुनवखगुणा:<sup></sup> नवशरचन्द्रगु<sup></sup>णा: सप्तशून्ययमदहना<sup></sup> । द्विजिनगुणा स्त्रिरस<sup></sup>रदा खस प्रयम छिद्रे<sup></sup>षु जिना: ॥ ४ ॥<sup></sup>

४ &nbsp;&nbsp;&nbsp;&nbsp; (घ) १. चन्द्रागुणा (च) for (चन्द्रगुणा:)
२. सप्त for (सप्त) (ग) सप्तयम वह्लयो व्यस्ता: ॥ ५ ॥ for (सप्रयम-
छिद्रेषु जिना: ॥ ४ ॥)
(ग) ३. गुणा for (गुणा:)
४. दहना: for (दहना)
५. रदा: for (रदा)
(क) 'क' में अंकित नहीं। इसके स्थान में दूसरा श्लोक अंकित है जो अगले पृष्ठ
पर दिया है।
(ख) यहां यह श्लोक अंकित नहीं है।
(च) २. सप्त for (सप्र)
६. छिद्रेशु for (छिद्रेषु)
७. क्रमसंख्या लुप्त ।
(क. ख. ग.) में अतिरिक्त श्लोक —
छिद्रेषु जिना कृतनव पंचयमा दं<sup>१</sup> नंद<sup>२</sup> चन्द्रमुनि पक्षा: ।
दन्ता<sup>५</sup>ष्टयम<sup>६</sup>मागुणा रामनवयमा: शशिख<sup>३</sup> रामा: ॥ ४ ॥
ऋतुनव खगुणा नवशरचंद्रगुणा: सप्तशून्ययमदहना: ।
द्विजिन<sup>४</sup> गुणास्त्रिरसरदा: खसप्तयम वह्नयो व्यस्ता:<sup>७</sup> ॥ ५ ॥
(क) १. यमा: for (यमा)
२. 'दं' लुप्त पद है। (ख)
३. शशियमखरामा: ॥ ४ ॥ (ख) शशिगुणखराम for (शशिखरामा:)
४. जित for (जिन)
(ख) ५. दताष्ट for (दन्ताष्ट)
६. यमगुण for (यमागुणा)
७. व्यास्ता: for (व्यस्ता:)
(च) वि० इस स्थान पर यह श्लोक लुप्त हैं ।
पृष्ठ ८b पर नीचे की ओर अन्य लेख में "ऋतुनव············से-खसप्रयम"
तक विद्यमान है । इस पर क्रम संख्या कोई नहीं ।