ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 432, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 432
( ४६ ) रविचन्द्रयोगलिप्ताः खयमस्वरभाजिताः फलं योगः¹ ॥ गतगम्ये षष्टिगुणे भुक्तिसमासाद्धृते² नाड्यः ॥ ६३ ॥ राश्यंशकला⁴ विकलाः⁵ स्फुटमासांते³ लिप्तिका⁶ विकला⁷ ।¹ पक्षांते⁸ तिथ्यंते समा रवीन्दोः² कला विकलाः ॥ ६४ ॥
६३. (घ) वि० यह श्लोक इस प्रति में उपलब्ध नहीं। न इस संख्या का कोई दूसरा श्लोक
ही। ऐसा प्रतीत होता है कि लिपिकार द्वारा यह श्लोक लिखने से रह गया ।
(ग) यह श्लोक इस प्रति में भी उपलब्ध नहीं है ।
(क) इस प्रति में उपलब्ध नहीं ।
(च) १. योगाः for (योगः) २. समासाधृते for (समासाद्धृते)
वि० यह श्लोक इस प्रति में १५A पृष्ठ पर ऊपर की ओर किसी अन्य हाथ से
लिखित है ।
६४. (घ) १. विकलाः (ग) (क) (च) (विकला)
२. रवीन्द्वोः (ग) (क) रवीस्ताः (ख) रवीन्द्रोः (च) for (रवीन्दोः)
(ग) ३. मासांतेश (घ) (क) (ख) मासांतेशा for (मासांते)
वि० इसकी श्लोक संख्या ६३ है ।
(क) ४. राश्यंश (ख) राशांश for (राश्यंश)
५. विकला for (विकलाः)
६. लिप्तिको for (लिप्तिका)
७. विवरलाश्चा for (विकलाः)
इसकी श्लोक संख्या ६३ है ।
(ख) ८. पक्षातो for (पक्षांते)
(च) ३. मासांतेश for (मासांते)