ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( ४७ )
कृष्णचतुर्दश्यन्ते¹ शकुनि⁴ पर्वणि चतुष्पद²प्रथमे । तिथ्यर्द्धते³ नागं⁵ किंस्तुघ्नं⁷ प्रतिपदाद्यर्द्धे⁶ ॥ ६५ ॥ व्यर्केंदु⁷ कला भक्ताः³ खरसगुणैः⁴ ३६० लब्ध⁵मूनमेकेन । चल⁸करणानि व⁹वादीन्यग हृतशेषे⁶ तिथिवदन्यत्¹ ² ॥ ६६ ॥
६५. (घ) यह श्लोक इस प्रति में उपलब्ध नहीं है ।
(ग) १. र्दश्यंते शशकुनिः for (र्दश्यन्ते शकुनि) (ख) चतुर्दशांते for (चतुर्दश्यन्ते)
२. चतुष्पदं (क) (ख) (च) for (चतुष्पद)
३. तिथ्यर्द्धेत्येनागं (क) तिथ्यर्द्धेऽन्ये (ख) तिथ्यर्वेत्यनागः for (तिथ्यर्द्धते नागं)
(क) ४. शकुनिः (ख) for (शकुनि)
५. मार्ग for (नागं)
वि० इसकी श्लोक संख्या ६४ है ।
(ख) ७. किस्तुघ्नप्रति for (किंस्तुघ्नं प्रति)
(च) ३. तिथ्यर्