भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 435

( ४६ ) पूर्वापरयोर्विद्धो १ तुल्य छायाग्रयो दिग्पराद्याः २ । पूर्वान्यः ५ क्रान्तिवशात्तन्मध्यात् ४ शंकुतलमितरे ३ ॥ १ ॥ नृछायाग्रगजमत्स्य १ द्वयमध्यगसूत्रयोर्युतिर्यत्र २ । सोत्तरगोले याम्या ५ शंकुतला ३ दक्षिणे सौम्या ॥ २ ॥ छायाग्रभ्रमरेखा ६ सूत्रद्युतेर्वृ २ तपरिधिरग्रस्पृक् । मध्यछायान्तरमुद्गीतरं ३ वा ५ शंकुमण्डलयोः ४ ॥ ३ ॥

१. (घ) १. विद्ध (ग) विट् (क) विन्दु (ख) विन्दु for (विद्धो)
२. दिग्पराद्यः (ग) दिगपरार्धः (क) दिग्पराधः for (दिग्पराद्याः)
(ग) ३. शंकुतलमिनरे (क) (ख) for शंकुतलमितरे)
(क) ४. तन्मध्या (ख) तन्मध्य for (तन्मध्यात्)
(ख) २. दिग्पराद्यः for (दिग्पराद्याः)
५. मूर्धन्याः for (पूर्वान्यः)
(च) २. दिग् for (दिग्)
२. (घ) १. नृछायाग्रजमत्स्य (क) त्रिछायाग्रजमत्स्य (ख) त्रिछायाग्रजमत्स्य for (नृछाया-
ग्रजमत्स्य)
(ग) १. त्रिछायाग्रजमछ्य for (नृछायाग्रजमत्स्य)
२. युति for (र्युति)
३. शंकुतला (क) कुंतला for (शंकुतला)
(क) ४. यत्र for (यंत्र)
५. दाम्यात् for (याम्या)
(क्षेप) क्षेपक नत्काले द्विवरं क्रान्त्यो लंबेन भाजितं गुणयेत् ।
तत्कर्णेन छायायाः प्राचीलब्धां गुणैरयनैः ॥ २ ॥ इतिक्षेपः
(ग) यह श्लोक इसी 'प्रति' में वह भी 'क्षेप' के नाम से उपलब्ध है ।
(क) यह श्लोक इस प्रति में नहीं है ।
(च) यह श्लोक इस प्रति में नहीं है ।
३. (घ) १. युते (ग) (क) युते (ख) (च) for (द्युते)
२. वृत्तस्पक् (ग) वृत्त (ख) वृत्त (च) for (वृंत)
३. सुदगितरं (ग) मुदगिरद्वा (क) मुदगितरथा for (मुदगीतरं)
४. मंडल्यो (च) for (मंडलयोः)
(क) ५. 'वा' पद लुप्त है । (ख) द्वा
(ख) ६. 'ग्र' लुप्त है
७. मध्या for (मध्य) ३. मुदगितर for (मुदगीतरं)