भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 442

( ५६ ) ⁶प्रक्षिप्य ²राशय भुक्तं शेषां सुभ्यः ³क्रमेण ⁴यावंतः । ¹शुद्धांत्फदया सूर्ये ताव॑तो राशयः ⁵क्षेप्याः ।। १६ । ¹शेषांत्रिशत् ²गुणितानस्तन ⁴शुद्धोदया सुभिर्विभजेत् । ⁶लब्धंभागादिरवौ ³प्रक्षिप्य तथा कृते लग्नम् ।। २० ।।

१६. (घ) १. शुध्यंत् (ग) शुध्यत्युदयाः (क) शुध्यंत्युदयाः (ख) for (शुद्धांत्फदया)
(ख) २. राश for (राश्य)
३. क्रमण for (क्रमेण)
४. यावतः for (यावंत)
५. 'क्षेप्याः' पदलुप्त है ।
(च) ६. + १७६५ ⎫ पिछले श्लोक के फुटनोट में संख्याएं दर्शा दी गई हैं ।
१६३५ ⎪
१६३५ ⎬
१३६५ ⎪
१५०६ ⎭
१. शुद्धांत्युदयाः for (शुद्धांत्फदया)
२०. (घ) १. शेषांस्तुंशद् (ग) शेषांस्त्रिंशद् for (शेषांत्रिशत्)
२. गुणिताः श्येनस्तन for (गुणितानस्तन) (ग) नसून for (नस्तन)
(क) दविशुद्धस्योदयाः for (नस्तनशुद्धोदया)
(क) ३. प्रक्षेप्यं for (प्रक्षिप्य)
(ख) १. शेषास्त्रिशद्गुणा for (शेषांत्रिशत् गुणिता)
२. तसून for (नरतन)
४. शुद्धासुभि for (शुद्धोदयासुभिर्)
५. वित्तजेत् for (विभजेत्)
६. लब्धा for (लब्धं)
(च) १. शेषांत्रिशद्गुणिताः ३० नस्तन for (शेषां त्रिशत् गुणितानस्तन)
७. क्रम संख्या लुप्त