भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

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( ५७ ) रविराशयभुक्तलिप्तास्तदुदय गुणिता हता॑ ग्रह॑क॑लाभिः १८००। लब्धं प्राणास्थाप्याः प्रक्षिप्यार्के ग्रहाभुक्तम् ॥ २१ ॥ तावत्सूर्ये राशि न क्षिपेत्समो लग्नराशिभिर्यावत् । क्षिप्रग्रहाणां प्राणान् प्रक्षिप्य स्थापितेष्वसुषु ॥ २२ ॥ तदधिककालोदयवधराशि कलाभिर्भजेत् फलं प्राणान् । प्रक्षिप्य प्राणेषु प्राणाः सूर्योदयादसकृत् ॥ २३ ॥

२१. (घ) १. हृतो (क) हृता (ख) कृता for (हतो)
२. गृहकलाभिः (ग) (क) (ख) गृहकालाभिः for (ग्रहकलाभिः)
३. गृहाभुक्तम् (ग) (क) (ख) गृहामुक्तम् for (ग्रहाभुक्तम्)
४. रविराश्यभुक्त (ग) (क) (ख) रविराशिभुक्त for (रविराशयभुक्त)
(ग) ५. लब्धंप्रा