भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 447

( ६१ ) घातोवार्कगुणाँ⁴ १२ स्त्रिंज्या विषुवत्कर्ण¹बंधः² हतः³ शंकुः । कर्णकृते⁵ संशोध्य द्वादशवर्ग १४४ पदं छाया⁶ ॥ ३२ ॥ अल्पप्रश्नासूनां² यदि बहवश्चरदलासवः क्षितिजा । हतयोना¹ जीवोना क्षयवृद्धिज्योक्तवच्छेषं³ ॥ ३३ ॥ स्वाहोरात्रार्द्धमुदकदक्षिणयोः¹ क्षितिज्यया⁶ युतविहीनं । द्युदलान्त्यज्या²भिज्य³ क्षयवृद्धिर्ज्या⁴ युतोनांत्या⁵ ॥ ३४ ॥

३२: (घ) १. कर्णाः (च) for (कर्ण)
२. वधः (ग) वध (क) for (बंधः) (ख) 'बंध' पद लुप्त है।
३. हृतः (ग) (क) (च) for (हतः)
(ग) ४. गुणास्त्रिज्या (क) (ख) for (कृते)
५. कृतेः (क) (ख) गुणास्त्रिज्या for (गुणा १२ स्त्रिंज्या)
६. छायाः for (छाया)
(क) संख्याएँ मूल में अंकित नहीं हैं ।
(ख) ७. संशोद्ध्या for (संशोध्य)
८. वर्गंगयछाया for (वर्ग १४४ पदं छाया)
(च) ४. घातोवार्कगुणा १२ for (घातोवार्कगुणा १२) २. वधः for (बंधः)
१. कर्णाः for (कर्ण)
३३. (घ) १. हृतयोना (ग) (च) for (हतयोना)
(ग) २. अल्पप्रश्नासूना for (अल्पप्रश्नासूनां)
(क) मूल श्लोक अंकित नहीं है—केवल टीका लिखी हुई है।
(ख) ३. छाषम् for (छेषम्)
३४. (घ) १. उदकदक्षिणयोः (ग) स्वाहोरात्रामुदग्दक्षिणयोः (ख) for (स्वाहोरात्रार्द्धमुद-
कदक्षिणयोः)
(ग) २. द्युदलांतिज्या for (द्युदलान्त्यज्या)
३. त्रिज्या (क) (ख) त्रिज्या (च) for (भिज्या)
४. वृद्ध्य for (वृद्धिर्ज्या)
५. नांत्याः for (नांत्या)
(क) १. स्वाहोरात्रार्धमुदग्दक्षिणयोः for (स्वाहोरात्रार्द्धमुदकदक्षिणयोः)
६. क्षितिजया (ख) पितिज्यया for (क्षितिज्यया)
(च) १. मुदग्दक्षिणयोः for (मुदकदक्षिणयोः)