भारतकोश
संग्रह पर लौटें

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

( ६१ ) घातोवार्कगुणाँ⁴ १२ स्त्रिंज्या विषुवत्कर्ण¹बंधः² हतः³ शंकुः । कर्णकृते⁵ संशोध्य द्वादशवर्ग १४४ पदं छाया⁶ ॥ ३२ ॥ अल्पप्रश्नासूनां² यदि बहवश्चरदलासवः क्षितिजा । हतयोना¹ जीवोना क्षयवृद्धिज्योक्तवच्छेषं³ ॥ ३३ ॥ स्वाहोरात्रार्द्धमुदकदक्षिणयोः¹ क्षितिज्यया⁶ युतविहीनं । द्युदलान्त्यज्या²भिज्य³ क्षयवृद्धिर्ज्या⁴ युतोनांत्या⁵ ॥ ३४ ॥

३२: (घ) १. कर्णाः (च) for (कर्ण)
२. वधः (ग) वध (क) for (बंधः) (ख) 'बंध' पद लुप्त है।
३. हृतः (ग) (क) (च) for (हतः)
(ग) ४. गुणास्त्रिज्या (क) (ख) for (कृते)
५. कृतेः (क) (ख) गुणास्त्रिज्या for (गुणा १२ स्त्रिंज्या)
६. छायाः for (छाया)
(क) संख्याएँ मूल में अंकित नहीं हैं ।
(ख) ७. संशोद्ध्या for (संशोध्य)
८. वर्गंगयछाया for (वर्ग १४४ पदं छाया)
(च) ४. घातोवार्कगुणा १२ for (घातोवार्कगुणा १२) २. वधः for (बंधः)
१. कर्णाः for (कर्ण)
३३. (घ) १. हृतयोना (ग) (च) for (हतयोना)
(ग) २. अल्पप्रश्नासूना for (अल्पप्रश्नासूनां)
(क) मूल श्लोक अंकित नहीं है—केवल टीका लिखी हुई है।
(ख) ३. छाषम् for (छेषम्)
३४. (घ) १. उदकदक्षिणयोः (ग) स्वाहोरात्रामुदग्दक्षिणयोः (ख) for (स्वाहोरात्रार्द्धमुद-
कदक्षिणयोः)
(ग) २. द्युदलांतिज्या for (द्युदलान्त्यज्या)
३. त्रिज्या (क) (ख) त्रिज्या (च) for (भिज्या)
४. वृद्ध्य for (वृद्धिर्ज्या)
५. नांत्याः for (नांत्या)
(क) १. स्वाहोरात्रार्धमुदग्दक्षिणयोः for (स्वाहोरात्रार्द्धमुदकदक्षिणयोः)
६. क्षितिजया (ख) पितिज्यया for (क्षितिज्यया)
(च) १. मुदग्दक्षिणयोः for (मुदकदक्षिणयोः)

( ६२ ) छेदहता^[१]^ द्युदलांत्या दिनार्द्ध^[४]^ कर्णेन वा कर्णाः^[२]^ । भक्ता ज्यया ऽथवाऽन्त्या दिनार्द्ध कर्णा हृता^[३]^ कर्णाः ॥ ३५ ॥ द्युदलान्नतो^[१]^ क्रमज्या स्वाहोरात्रार्द्धा^[४]^ संगुण विभजेत् । व्यासार्द्धेन फलोना^[५]^ द्युदलान्त्ययाथवा^[३]^ छेदः ॥ ३६ ॥ अन्त्यानतो^[१]^ क्रमज्या हीनां ज्या षट् पृथक्^[२]^ छेदः^[३]^ । ज्याभ्यां^[४]^ च सह फलानि छाया नयनानि षट्^[६]^ त्रिंशत् ॥ ३७ ॥

३५. (घ) २. वा गुणा for (वा) (ग) संगुणा for (वा) (क) संगुणा for (वा) (ख)
कर्णाः for (वाकर्णाः)
१. छेदहता (ग) (क) (च) for (छेदहता)
(ग) ३. कर्णांहता (क) कर्णांहिता (ख) कर्णाः हता for (कर्णाहृता)
(ख) ४. नबागुणाः for (र्द्धकर्णेन)
(च) २. वागुणाकर्णाः for (वाकर्णाः)
३६. (घ) १. द्युदलान्ततोत्क्रमज्यां (ग) (क) (च) for (द्युदलान्नतो क्रमज्या)
२. स्वाहारात्रार्ध संगुणं विभजेत् । (ग) स्वाहोरात्रार्द्धंसंगुण विभजेत् for
(स्वाहोरात्रार्द्धं संगुणा विभजेत्)
३. दलान्त्य ज्याथवा for (द्युदलान्त्ययाथवा)
(ग) ३. दलान्त्यज्या यथा (क) द्युदलान्त्यज्याथवा (ख) for (द्युदलान्त्ययाथवा)
(क) ४. संगुणाम् (ख) संगुणं for संगुणा
(ख) १. द्युदलन्नतोरुकमजां for (द्युदलान्नतो क्रमज्या)
२. स्वाहोरात्रार्द्धं for (स्वाहोरात्रार्द्धं)
५. फलेना for (फलोना)
(च) २. स्वाहोरात्रार्द्धं for (स्वाहोरात्रार्द्धं)
४. संगुणां for (संगुणा)
३७. (घ) १. अन्त्यानतोत्क्रमज्याहीना (ग) (क) (ख) for (अन्त्यानतो क्रमज्याहीनां)
३. छेदाः (ग) (ख) छेदा for (छेदः)
(च) ४. 'च' अतिरिक्त पाठ
५. फलनि for (फलानि)
६. ष्टट्त्रिंशत् for (षट्त्रिंशत्)
(च) १. अन्त्यानतोत्क्रमज्याहीन for (अन्त्यानतो क्रमज्याहीनां) ३ छेदाः for (छेदः)

( ६३ ) छाया कर्णविभक्ता⁴ विषुवत्कर्णेन संगुणा² नृज्या¹ । लब्धं सौम्येतरयोः⁵ क्षितिज्यया⁶ हीनसंयुक्तं³ ॥ ३८ ॥ गुणितं व्यासाद्धेन स्वाहोरात्राद्धं¹ भक्तमाप्तधनुः² । उत्तर गोले युक्तं याम्ये हीनं चरप्राणैः³ ॥ ३९ ॥ दिनगतशेषच्छेदप्राणाः³ ⁴ प्रागपरदिनाद्ध॑योविशोध्याप्तम्⁶ । व्यासाद्धे¹ छेषो⁵ क्रमजीवा चापं नताः² प्राणाः ॥ ४० ॥ स्वाहोरात्राद्धेन छायाकर्णार्हतेन² भक्ताया¹ । विषुवत्कर्णं³ गुणण्या व्यासाद्ध॑कृतेः⁴ फलं सौम्ये ॥ ४१ ॥

३८. (ग) १. त्रिज्या (क) (ख) त्रिज्या for (नृज्या)
(क) २. संगुण for (संगुणा)
३. संयुक्तम् (ख) for (संयुक्तं)
(ख) ४. विभक्त for (विभक्ता)
५. सौम्येतरयो for (सौम्येतरयोः)
६. ज्याया for (ज्यया)
३९. (ख) १. रात्रार्द्ध for (रात्राद्धं)
२. भक्तमप्तधनुः for (भक्तमाप्तधनुः)
३. प्राणै for (प्राणैः)
४०. (घ) १. व्यासाद्धच्छिषोत्क्रम (ग) व्यासाद्धर्द्धातिशेषोत्क्रम for (व्यासाद्धे छेषोक्रम)
२. नता (क) नत for (नताः)
(ग) ३. शेषप्राणः (क) शेषप्राणाः for (शेषच्छेद प्राणाः)
(क) ४. 'च्छेद' पद लुप्त है । (ख)
५. शेषोत्क्रम (ख) छेषोत्क्रम for (छेषोक्रम)
(ख) ६. विशोध्यत्तम् for (विशोध्याप्तम्)
(च) १. व्यासाद्धच्छिषोत्क्रम for (व्यासाद्धे छेषो क्रम)
४१. (ग) १. भक्तायाः (क) (ख) for (भक्ताया)
(ख) २. कर्णाहतेन for (कर्णार्हतेन)
(ख) ३. विषुवत्कर्णा for (विषुवत्कर्णं)
४. गुणाय for (गुणण्या)
५. कृते for (कृतेः)

( ६४ ) क्षयवृद्धिद्विज्याहीनं युक्तं याम्ये² धनुश्चरप्राणैः³ ।⁴ सौम्येयुतं विहीनं याम्ये प्रागपरयोः⁵ प्राणाः¹ ।। ४२ ।। अह््नोगताऽवशेषाः³ फलमन्त्याया विशोध्य शेषस्य । धनुरुत्क्रमजीवाभिः¹ पूर्वापरयोर्नताः² प्राणाः⁴ ।। ४३ ।। दिनदलकरणगुणान्त्य³ छायाकर्णोद्धृता⁴ फलोनान्त्या² । शेषस्योत्क्रमजीवा⁵ धनुर्दिनाद्ध्र्नताः¹ प्राणाः ।। ४४ ।। चरदल जीवोनाधिक फल क्रमज्यो¹ धनुश्चरार्द्धेन । युतहीनं पूर्वाह्ने³ दिवसगतं शेषं⁴ अपराह्ने² ।। ४५ ।।

४२. (क) १. प्राणैः (ख) प्राणः for (प्राणः)
(ख) २. याम्यो for (याम्ये)
३. धनुशर for (धनुश्चर)
४. प्रणै for (प्राणैः)
५. प्रागपरयो for (प्रागपरयोः)
४३. (घ) १. धनुरुत्क्रमजीवाभिः (ग) (क) (ख) (च) for (धनुरुत्क्रमजीवाभिः)
(ग) १. नंन्ता (क) नत for (नंताः)
(क) ३. अह््नोगतावशेषात् (ख) अह््नोगतावशेषा for (अह््नोगताऽवशेषाः)
(ख) ४. प्राणः for (प्राणाः)
(च) ३. अवग्रहचिह्न लुप्त
४४. (घ) १. दिनाद्धान्नताः for (दिनाद्ध्र्नताः) (ग) (क) दिनाद्ध्नत for (दिनाद्ध्र्नताः)
(ग) २. नान्त्या (ख) नान्त्या for (नान्त्या)
(ख) ३, गुणान्‍त्या
४. कर्णाद्वृता for (कर्णोद्धृता)
५. जीव for (जीवा)
१. दिनाधोन्नतप्राणः for (दिनाद्ध्र्नताः प्राणाः)
(च) १. धनुर्दिनाद्धन्निताः for (धनुर्दिनाद्ध्र्नताः)
४५. (घ) १. क्रमज्या (ग) (क) (ख) क्रमज्या for (क्रमज्यो)
२. शेषमपराह्ने (ग) (ख) शेषमपराह्वे (च) for (शेषं अपराह्ने)
(ग) ३. पूर्वाह्वे (ख) पूर्वाह्न for (पूर्वाह्ने)
(ख) ४. विवसगतं for (दिवसगतं)

( ६५ ) उत्क्रमजीवाभ्यधिक क्रमज्यया संयुक्तं (तं) धनुर्धनुषां । व्यस्तविशुद्धौ हीनाश्चरांसवः पूर्ववच्छेषं ॥ ४६ ॥ दिनमध्यार्का क्रांत्याक्षभागयोगांतरं सामान्यदिशोः । नतभागा नवते प्राक् ज्योन्नताः शेषाः ॥ ४७ ॥ नतभागज्या द्वादशगुणोन्नतांशज्यया हृताल्लब्धम् । इष्टदिनार्द्धच्छाया यथोक्तकरणैर्द्दिनार्द्धाद्वा ॥ ४८ ॥ ४६. (घ) १. संयुतम् (ग) (क) (ख) संयुते for (संयुक्तं) २. चरासवः (ग) (क) (ख) (च) for (चरांसवः) ३. पूर्ववच्छेषं (ग) पूर्ववत्सेषम् for (पूर्ववच्छेषं) ५. व्यक्त for (व्यस्त) (ज) १. संयुतं for (संयुक्तं) ६. धनुर्द्धनुषा for (धनुर्धनुषां) ४७. (घ) १. दिनमध्यार्क (

( ६६ ) उन्नतजीवाभक्तं⁴ व्यासार्द्धं⁵ द्वादशाहतं³ कर्णः । मध्यच्छायाकर्ण¹द्वादशक्रान्त्यन्तरं² पदं वा ॥ ४६ ॥ कुदलांत्याज्या¹ छेदोमध्यछाया यथोक्तकरणैर्वा । अन्त्याज्या⁴ छेदाद्यं⁵ मध्यच्छायाऽथवा बहुधा । ५० ॥ विषुवत्करणेन⁶ गुणा¹ विषुवच्छाया हतोत्तरा क्रान्तिः । यद्युनाक्षक्षज्याया³ शकुसममंडलस्थेऽर्के⁵ ⁴ ⁷ ॥ ५१ ॥

४६. (घ) १. छायाम् for (छाया)
\hspace{1.8cm} २. कृत्यन्तरपदम् (ग) (क) कृत्यन्तरपदं वा for (क्रान्त्यतरं पदं वा)
\hspace{1.8cm} ३. द्वादशाहतं ११ for (द्वादशाहतं)
\hspace{0.9cm} (ग) ४. भुक्तं for (भक्तं)
\hspace{0.9cm} (ख) ५. व्यासार्ध for (व्यासार्द्धं)
\hspace{1.8cm} १. 'मध्यच्छायाकर्णं' पद लुप्त हैं।
\hspace{1.8cm} २. कृतंतर for (क्रान्त्यतरं) यहां दूसरी पंक्ति 'द्वादश' से आरम्भ है।
\hspace{0.9cm} (च) १. छायां for (छाया) २. कृत्यंतरपदं वा for (क्रान्त्यतरं पदं वा)
५०. (घ) १. घुदलां (ग) (क) (ख) (च) for (कुदलां)
\hspace{0.9cm} (ग) २. त्यज्या (क) (ख) for (त्याज्या)
\hspace{1.8cm} ३. वरगौर्वा (ख) करणौ वाः for (करणैर्वा)
\hspace{0.9cm} (क) ४. अन्त्यज्या (ख) अत्याज्याः for (अन्त्याज्या)
\hspace{0.9cm} (ख) ५. मध्यछाया for (मंध्यछाया)
\hspace{0.9cm} (च) ६. अवग्रह चिह्न लुप्त
५१. (घ) १. विषुवच्छाया (ग) (ख) 'विषुवच्छाया for (विषुवत्छाया)
\hspace{1.8cm} २. हतोत्तरा for (हतोत्तरा) (क) छायोद्धूतोत्तरा for (छायाहतोत्तरा)
\hspace{1.8cm} ३. यदूनाक्षय्याया (ग) यूनाअज्यायाः (क) यदूनाक्षज्यायाः for (यद्युनाक्ष-
\hspace{2.3cm} क्षज्याय)
\hspace{1.8cm} ४. समं (च) for (सम)
\hspace{0.9cm} (ग) ५. शंकुः (क) (ख) 'शंकु' लुप्त पद for (शंकु)
\hspace{0.9cm} (क) ६. बिषुवत्कर्णन for (विषुवत्करणेन)
\hspace{1.8cm} ३. यदूनाक्षज्यायाः for (यद्युनाक्षक्षज्याया)
\hspace{1.8cm} ७. मंडलास्थेर्के for (मंडलस्थे ऽर्के)
\hspace{0.9cm} (च) १. विववच्छाया for (विषुवत्छाया)
\hspace{1.8cm} २. हृतोत्तरा for (हतोत्तरा) ३ यदूनाक्षज्याया for (यद्युनाक्षक्षज्याया)

या? No. Wait, let's look at line 9 again very carefully: २. विषुवच्छाया (ग) for (विषुवच्छाया)Wait, look at(विषुवच्छाया)in line 9: Wait! Is thatघ्छाया? Look at (विषुवच्छाया)in line 9: Wait, the loop on the left of: In line 2 of the verse: विषुव²च्छाया- wait, the footnote numberis right aboveच्छ! विषुव²च्छायाCould it beविषुवच्छाया? Wait, why would it say २. विषुवच्छाया (ग) for (विषुवच्छाया)? Wait, look at the letters in line 9: २ . वि षु व च्छा या ( ग ) f o r ( वि षु व च्छा या )Wait, look at the first word: is thatविषुवच्छाया? Wait, is there a dot? No. Let's look at line 9 in comparison with line 18: Line 18: १. विषुवच्छाया (ग) (च) for (विषुवघ्छाया)Wait, in line 18, it's definitelyविषुवघ्छाया` in parentheses! Look at the

( ६८ ) विषुवच्छाया^१ कृत्याद्वा^३ संगयुतया^२ ७२ न्यकृतियुतादाद्यात्^६ । पदमन्ययुतविहीनं^४ सौम्येतरगोलयोः^५ शंकुः ॥ ५५ ॥ विदिशोः^१ सौम्येतरयोरुत्तरगोले^६ ^२ पदोनयुक्तो^५ न्यः । सममण्डल दक्षिणातोतच्छाया^४ ^३ नाडिकाः^७ प्राग्वत् ॥ ५६ ॥ प्राच्यपरा^३ शंकुतलान्तरद्वयव्यस्तकर्णावधविवरं । समदिग्विषुवच्छायान्यदिगैक्यं^१ कर्णाविवरहतम्^२ ॥ ५७ ॥

५५. (घ) १. विषवच्छाया, (ग) for (विषुवच्छाया)
२. गसंयुतया ७२ for (संगयुतया ७२)
(ख) ३. कृत्याः व्यागसंयुतया for (कृत्याद्वा संगयुतया ७२)
(ग) ३. कृत्याद्वचग ७२ संयुतया (क) for (कृत्या द्वासंगयुतया)
४. परमन्ययुत (ख) पदमन्ययुतं for (पदमन्ययुत)
(ख) ६. युताद्याद्यात् for (युतादाद्यात्)
(च) १. विषुवच्छाया for (विषुवच्छाया) २. गसंयुतया ७२ for (संगयुतया ७२)
५६. (घ) १. विदिशो सौम्येतरयो (ग) विदशो सौम्येतरयो (क) for (विदिशोः सौम्ये-
तरयो)
२. रुत्तरागाले (क) रुत्तरागोले for (रुत्तरगोले) (ख) गोपदान for (गोलेप-
दोन)
३. तच्छाया (क) नच्छाया (ख) तच्छाया for (तच्छाया)
(ग) ४. दक्षिणागतच्छाया (क) दक्षिाणगे (ख) दक्षिाणगो for (दक्षिणातो)
(क) ५. ऽन्यः । (ख) युक्ता यः for (युक्तोन्यः)
(ख) १. वेदि for (विदिशोः)
६. शोम्येतरयो for (शौम्येतरयो)
७. नाहिका for (नाडिकाः)
(च) १. विदिशो for (विदिशोः) ३. तछाया for (तच्छाया)
५७. (घ) १. विषवच्छायां (ग) (क) विषुवच्छाया for (विषुवत्च्छाया)
२. कर्णाविवरहृतम् (ग) कर्णाविवरहृतम् for (कर्णाविवरहतम्)
३. यात्यपरा (ग) प्राच्यापरा for (प्राच्यपरा)
(च) १. विषुवच्छाया for (विषुवत्च्छाया) २. कर्णाविवरहृतम् for (कर्णाविवरहतं)

विषुवच्छायां for (विषुवत्च्छायां) २. गुलांतरं for (ङ्गुलांतरं)` Wait, where is 3? Maybe omitted in print, but superscript 3 is in text above कर्णोद्धृतं!

Let's carefully verify the apparatus text:

Under divider line: ५८. (घ) १. विषुवच्छाया (ग) (च) for (विषुवत्च्छाया) Wait, let's look at the parenthesis in line : (विषुवच्छाया) or (विषुवत्च्छाया)? Ah, let's look closely at (विषुवच्छाया) in line : Does it have 'त्'? Wait, in line : ५८. (घ) १. विषुवच्छाया (ग) (च) for (विषुवच्छाया) Wait, if both are विषुवच्छाया, why? Look at the first: विषुवच्छाया. Look at the second: (विषुवच्छाया) or (विषुवत्च्छाया)? Look at the character before 'च्छा': In the second, there is a loop/stroke! It's विषुवत्च्छाया! Wait, what about the main text line 3? विषुवत्च्छायाज्जादिषु! So the text has `विषुवत्

( ७० ) क्रान्तिव्यासाद्धंगुणां ३२७० जिनभागज्या १३२६४ हतातुरजादौ । कर्कादौ चक्राद्धौत्प्रोक्तुलादौ स चक्रार्द्धं ॥ ६१ ॥ चक्रात्प्रोह्य मृगादौ स्फुटो सकृत् व्यस्तमृणं धनंमध्यम् । अर्कास्माद्देशान्तरयुगयाते मध्यमा प्राग्वत् ॥ ६२ ॥ ६१. (घ) १. क्रान्तिव्यासार्धं गुणाः (ग) क्रान्तिव्यासार्द्धं गुणा (क) for (क्रान्तिव्यासाद्धं गुणा) २. कर्यादौ (ग) (क) (च) for (कर्कादौ) ३. प्रोत्तुलादौ (ग) प्रोह्य (क) for (प्रोक्तुलादौ) ४. वक्रार्धम् (क) चक्रार्द्धं (सभाषेन) for (चक्रार्द्धं) ५. १३२६ for (१३२६४) ६. धनुरजादौ (ग) हृता धनुरजादौ (क) for (हतातुरजादौ)

( ७१ ) शशिमृगोन्नत्यर्धं रात्रेर्गतशेषनाडिकां शङ्कुं । विपरीतगोलविधिना रात्र्यर्द्धा क्रान्तिराभिर्वा ॥ ६३ ॥ क्षितिजेऽग्रा प्राच्यपराक्रान्तिस्त्रिज्यागुणावलम्बहता । द्विगुणमुदयास्तसूत्रं तत्रिज्या कृतिविशेषपदम् ॥ ६४ ॥ अक्षज्या शंकुवधालम्बकलब्धोदयास्तमयसूत्रात् । दक्षिणतः शंकुतलं दिवसो रात्रौ तदुत्तरतः ॥ ६५ ॥ दिग्लम्बाक्षस्वोदयलग्नच्छायादिषु यदिष्टेषु । षट् षष्टचार्याणां त्रिप्रश्नाध्यायस्तृतीयोऽयम् ॥ ६६ ॥ इति ब्रह्मगुप्ते तृतीयोऽध्यायः

६३. (घ) १. श्रृंगोन्नत्यर्थं (ग) श्रृंगोन्यत्यर्थं (क) शृङ्गोन्नत्यर्थं for (शशिमृगोन्नत्यर्धं)
२. नाडिकाम् for (नाडिका)
३. शंकुः (ग) (क) for (शंकुं)
४. रात्र्यार्धाक्रांतिराभिर्वा (ग) क्रांतिराभिर्वा (क) कोन्तराभिर्वा for (रात्र्य-
र्द्धा क्रान्तिराभिर्वा)
(ग) ५. विपरीतगेलविधि for (विपरीतगोलविधिना) (च) विपरित for (विपरीत)
(च) १. शृंगोन्यत्यर्थं for (शशिमृगोन्नत्यर्धं)
४. रात्र्यार्धाक्रांतराभिर्वा for (रात्र्यर्द्धाक्रान्तिराभिर्वा)
६४. (क) १. हृता (क) (च) for (हता)
(ग) २. गुणवलंबहृता for (गुणावलम्बहता)
(क) ३. वियुक्तपदम् for (विशेषपदम्)
(च) ४. त्सूत्रं for (सूत्रं)
६५. (घ) १. शंकुवधाल्लं बंक for (शंकुबधालम्बक) (ग (क)
(ग) २. लब्धोदयस्तसूत्रात् for (लब्धोदयास्तमयसूत्रात्)
(क) ३. शंकुः for (शंकु)
६६. (घ) १. दिल्लंवाक्ष for (दिग्लम्बाक्ष)
(ग) २. छायादिषूपदिष्टेषु (क) (च) for (छायादिषु यदिष्टेषु)
३. त्रिप्रस्ताध्यायः for (त्रिप्रश्नाध्यायस्)
(क) ४. तृतीयोऽयम् for (तृतीयोयम्)
(च) ४. त्रतीयोयं ॥३॥ for (तृतीयोयं ॥६६॥)
वि० श्लोक क्रमांक ६६ के स्थानपर 'तीन' का अंक अध्याय की क्रम
संख्या को दर्शाता है ।

( ७२ ) कालज्ञानं प्रायः पर्वज्ञानार्थमिष्यते सद्भिः । शशिभास्करग्रहणयोस्तद्द्व्यक्तिः¹ स्फुटाभेदैः ॥ १ ॥ दिग्वर्णावलनवेलायां निमिलनो³न्मीलनस्थितिविमर्दाः । स्पर्श-छाया-मोक्ष-ग्रासेष्ट-ग्रास-परिलेखा² ॥ २ ॥ भेदा⁴श्चतुर्दश तयोरिन्द्वर्कग्रहणयोः⁵ परिज्ञानात्¹ । यस्माद्‌दूज्ञानं तस्माद् ग्रहणं² प्रवक्षामि³ ॥ ३ ॥ तिथिगतगम्ये भुक्ति¹ भुक्त्यंतर⁴हते² फलोनयुतौ । रविशशिनौ समलिप्तौ यात³स्तात्कालिको भवति ॥ ४ ॥

१. (घ) १. तदभिव्यक्तिः (ग) for (तद्द्व्यक्तिः)
(क) १. स्वदभिव्यक्तिः for (तद्द्व्यक्तिः)
(च) १. तदभिव्यक्तिः for (तद्द्व्यक्तिः)
२. (

( ७३ ) खत्रिघन (घ्न) गुणा व्यासाद्धै^४ भाजिता^२ ३२७० चन्द्रपातयोगज्या^३ । विक्षेपकालाः^५ सौम्याः षट् राश्यूनधिके^१ याम्याः ॥ ५ ॥ रवशिशिभुक्तो भवदशगुणै^५ नख स्वरजिनैः^६ हते^२ नात्ते^३ । तत्वाष्टगुणितभुक्त्योर्विववरं^८ षष्ट्याहृतं तमसाः ॥ ६ ॥ छाद्य^१ छादक मानैक्यार्धं विक्षेप हनिकं^२ हन्नं^३ $\frac{११}{२०}$ $\frac{१०}{२४}$ । सर्वग्रहणं ग्राहचादधिके खण्डग्रहणमूने^४ ॥ ७ ॥

५. (च) १. षड्राश्यूने धिके (ग) षड्राशूनेधिके (क) षड्राश्यूनेऽधिके for (षट्राश्यूनधिके)
(ग) २. विभाजिता for (भाजिता)
३. ज्याः for (ज्या)
४. +२७०+
५. कलाः (क) for (कालाः)
(च) ६. सौम्या for (सौम्याः)
१. षड्राशूनधिके for (षट् राश्यूनधिके)
६. (घ) १. नखैः (क) (च) for (नखै)
२. हृते (ग) (क) (च) for (हृते)
३. माने (ग) (क) (च) for (नात्ते)
४. षष्ट्याहृतमंतरं तमसः (ग) षष्ट्याहृतं तसमः for (षष्ट्याहृतं तमसः)
(ग) ५. गुणौः १११०। for (गुणे)
६. जिनै २०१२४७ (क) जिनै for (जिनैः)
७. तत्वाष्ट २५१८ (क) तत्त्वाष्ट for (तत्वाष्ट)
(क) ८. भुक्तयो विवरं for (भुक्त्योर्विवरं)
६. षष्ट्याहृतं for (षष्ट्याहृतं)
७. (घ) १. छाद्य- (ग) (क) for (छाद्यं)
२. हीनकं (ग) (क) (च) for (हनिकं)
३. छन्नं । (ग) छिन्नम् (क) छन्नम् (च) for (हन्नं)
४. खण्ड (क) for (खण्ड)
(च) वि० इस श्लोक के बाईं ओर “ ${|c|c|} ११ & १०
 \hline २० & २४ $ ” संख्यासारणी अंकित है।

( ७४ ) छाद्येन युतोनस्य छादकमानस्य तद्दलकृतिभ्याम् । विक्षेपकृत्ति प्रोह्य पदेति र्व स्थिति विमर्दार्द्धे ॥ ८ ॥ षष्ट्या विभाजिता स्थितिविमर्दार्द्धनाडिका गुणाः स्वगतिः । आदौ रविशशिपातेषूणमसकृतेषु धनमंते ॥ ९ ॥ स्पर्शात्तन्निमीलनं स्थितिदले विमर्दार्द्धहीनके पश्चात् । मोक्षादर्वागुन्मीलनं विमर्द्दस्तयोरैक्यम् ॥ १० ॥ भुत्तयन्तरमिष्टोनस्थितिदलघटिका गुणाहतं षष्ट्या । बाहुः प्राग्वत् तत्फलहीनयुतैः सूर्यशशिः पातैः ॥ ११ ॥

८. (घ) १. छदक for (छादक)
२. कृति (ग) for (कृत्ति)
३. तिथिवत् (ग).(क) for (तिवस्थिति)
(क) ४. युतोनास्य for (युतोनस्य)
५. विमर्दोघे for (विमर्दार्द्धे)
(च) २. कृति for (कृत्ति) ३ थिवस्थिति for (वस्थिति)
९. (घ) १. विमर्द्ददलनाडिका (ग) (क) for (विमर्दार्द्धनाड़िका)
२. ३. पातेष्वृणमसकृत्तेषु (ग) (क) (च) for (पातेषूणामसकृतेषु)
४. धनमन्तेः for (धनमंते)
(ग) ५. गुणास्त्वतिः । (क) गुणास्वगतिः for (गुणाः स्वगतिः)
(क) ६. रवींदु for (रविशशि)
१०. (घ) १. निमीलिनं (च) for (न्निमीलनं)
(ग) २. तदर्द्धैक्यम् (क) तदैक्चार्धः for (तयोरैक्यम्)
(च) ३. माक्षा for (मोक्षा)
४. रेक्यम् for (रैक्यम्)
११. (घ) १. हृतं (ग) (क) (च) for (हृतं)
२. बहुः for (बाहुः)
३. सूर्यशशिपातैः (ग) (क)
(ग) ४. गुणां for (गुणा)
(क) ५. तत्फलं for (तत्फल)
३. सूर्यशशिपातैः for (सूर्यशशिः पातैः)

( ७५ ) तात्कालिकविक्षेपः कोटिस्तद्वर्गयुतिपदं¹ कर्णः । मानैक्यार्द्धात्कर्णं विशोध्य तात्कालिको ग्रासः ॥ १२ ॥ असकृत्¹ ग्रासकालोनप्रमाणयुतिदलकृते विशोध्य⁶ कृतिं⁴ । तत्कालिकविक्षेपस्य² शेषमूलकृतं³ तिथिवत्⁵ ॥ १३ ॥ प्रग्रहण स्थित्यार्द्धात्४ प्राज्यप्रग्रहणतो¹ भवति कालः । मोक्षे विशोध्य मोक्षस्थित्यर्द्धात्प्राग् भवेत्³ मोक्षम्² ॥ १४ ॥ स्फुटतिथ्यंते मध्यं प्रग्रहणं² स्थितिदलोनकेभ्योऽधिके¹ । मोक्षो निमीलनोन्मीलने विमर्दार्धहीनयुते४ ॥ १५ ॥

१२. (घ) १. तद्वर्गयुति (ग) तद्वर्ग संयुति for (तद्वर्गयुति)
१३. (घ) १. असकृद्ग्रासकलोन (ग) असकृग्रास कलोन for (असकृत्ग्रासकालोन)
२. तात्कालिक (ग) (च) for (तत्कालिक)
३. शेषमूलं (च) for (शेषमूल)
(ग) ४. कृति for (कृतिं)
५. तिथिवत् for (तिथिवत्)
(क) १. असकृद्ग्रासकालोन for (असकृत् ग्रासकालोन)
(च) १. असकृद्ग्रासकलोन for (असकृत्ग्रासकालोन)
६. विशोध्य for (विशोध्य)
१४. (घ) १. प्रग्रह्णतो (ग) प्राज्यप्रग्रह्णतो (क) प्रोज्य प्रग्रह्णत्रो for (प्राज्यप्रग्रहणतो)
२. मोक्षात् (ग) (च) for (मोक्षम्)
(ग) ३. भवेन् (क) for (भवेत्)
(क) ४. स्थित्यर्थात् for (स्थित्यर्द्धात्)
५. मोक्षं for (मोक्षे)
(च) १. प्राज्य प्रग्रहणतो for (प्राज्यप्रग्रहणतो)
१५ (घ) १. दलोनवचे (क) दलोनकेऽम्यधिके for (दलोनकेभ्योऽधिके)
(ग) २. प्रग्ग्रहणं for (प्रग्रहणं)
३. स्थितित्दलदलोनकेम्यधिके for (स्थितिदलोनकेभ्योऽधिके)
(च) १. अवग्रहचिन्हलुप्त ४. विमर्द्दार्द्ध for (विमर्द्धार्ध)

प्राग्^१ पश्चा^७न्नतविषुवज्ज्यो^२ र्वं^३धा त्रिज्ययाप्तचापांशैः । उत्तरयाम्यैः^८ पूर्वा^४ विषुवद्^५ वृतत्रिभे^९ ग्राह्याः^६ ॥ १६ ॥ सममंडलं^१विषुवतो ग्राह्या त्रिग्रहा^२धिकादुदग्‍याम्यैः । क्रान्त्यंशैरपममंडलपूर्वास्या^३ञ्चन्द्रविक्षेपः ॥ १७ ॥ एकान्यदिशा^३युतिवियुतेर्ज्या प्रग्रहणमध्य मोक्षेषु । वलनं_४ निमीलनोन्मीलनैष्टकालेष्टवो^२ ऽन्येदिशां ॥ १८ ॥

१६. (घ) १. प्राक् (ग) (क) (च) for (प्राग्)
२. विषुवज्ययो (ग) (क) (च) for (विषुवज्यो)
३. वंधात्रिज्यया (ग) (क) (च) for (वंधात्रिज्यया)
४. पूर्वादिषु for (पूर्वाविषुवद्)
५. वृत्त (ग) वृत् for (वृत)
६. ग्राह्या (क) for (ग्राह्याः)
(क) ७. पश्चात् विषुवज्ज्यो for (पश्चान्नतविषुवज्ज्यो)
८. याम्यै for (याम्यैः)
९. त्रिभे for (त्रिभे)
१७. (घ) १. सममंलाद्विषुवतो (ग) for (सममंडलविषुवतो)
२. त्रिगृहाधिका (ग) for (त्रिग्रहाधिका)
३. पूर्वास्याश्चन्द्र (ग) (क) (च) for (पूर्वास्याञ्चन्द्र)
(क) १. सममंडलाद्विषुवतो for (सममंडलविषुवतो)
१८. (घ) १. न मीलानान् for (निमीलनोन्)
२. कालेष्वतोऽन्यदिशाम् (ग) (च) for (कालेष्टवोऽन्येदिशां)
(ग) ३. एकान्यदिशां (च) for (एकान्यदिशा)
४. विमलं for (वलनं)
(क) अवराम्यदिशाँ ज्यातिहि कुतज्यप्रग्रहणमध्यमोक्षेषु ।
वलनं निमीलनोन्मीनानष्टकालेष्टतोऽम्यदिशाम् ॥ १८ ॥
(च) २. कालेष्वतोन्यदिशां for (कालेष्टवोऽन्येदिशां)

( ७७ ) आद्यन्त्ययोः सधूम्रः कृष्णः खण्डग्रहेऽर्द्धतोऽभ्यधिके ग्रासः । सकृष्ण (ष्ण) ताम्रः सर्वग्रहणे शशिकपिलवर्णः ॥ १६ ॥ मानविमर्दस्थितीदलवलनेष्ट ग्रास समकलाद्येषु । चन्द्रग्रहणाध्याय विंशतिरार्या श्चतुर्थोयां ॥ २० ॥ इति ब्रह्मगुप्ते चतुर्थोऽध्यायः

१६. (घ) १. आद्यन्तयोः (ग) (क) for (आद्यन्त्ययोः)
२. षण्डग्रहे (ग) for (खण्डग्रहे)
३. ऽर्केतोभ्यधिके for (ऽर्द्धतोभ्यधिके)
४. ग्रासः (दूसरी पंक्ति का आरम्भ) (ग) (क)
५. शशी (ग) (क) (च) for (शशि)
६. कपिलाँ (ग) कपिलवर्णाः (क) कपिलः for (कपिलवर्णः)
७. वर्णाः (यह शब्द नहीं है) (क) 'वर्णा' पद लुप्त
(ग) ८. सुधूम्र for (सधूम्रः)
(च) ३. द्वैतोभ्यधिके for (र्द्धतोम्यधिके) ६. कपिल for (कपील)
२०. (घ) १. दवलनेष्ट for (दलवलनेष्ट)
२. चन्द्रग्रहणाध्यायो (ग) (क) for (चन्द्रग्रहणाध्याय)
३. चतुर्थीयम् । (ग) (क) for (चतुर्थोयां)
५. 'इति' से 'अध्यायः' तक अंकित नहीं । केवल अध्याय समाप्ति सूचक “छः”
अंकित है ;
(च) २. चंद्रग्रहणाध्याया for (चन्द्रग्रहणाध्याय) ३. चतुर्थोयं for (चतुर्थोयां)
५. 'इति' से 'अध्यायः' तक लुप्त हैं। अध्याय समाप्ति सूचक कोई और चिह्न
भी विद्यमान नहीं ।

( ७८ ) दृग्गणितैक्यं¹ न² भवति यस्मात्पंचज्यया रविग्रहणे । यस्माद्यथा³ तदैक्यं तथा प्रवक्ष्यामि तिध्यन्ते ॥ १ ॥ वित्रिभलग्न¹समेऽर्के⁴न लम्बनं तदधिकोनके भवति । तत्संक्रांति³ ज्योदक्² यदाक्षजीवा समा न तदा ॥ २ ॥ अवनतिरतोऽन्यथा भवति संभवेत्तदुदयै¹र्विलग्नसमं² कृत्वा⁵ । तदुदितघटिकातः छंकुस्³तच्चरप्राणैः⁴ ॥ ३ ॥ त्रिज्याकृते¹ चतुर्गुणशंकुहताया² फलेन भक्तायाः । तात्कालिकार्कराशित्रयोनलग्नान्तरज्याया⁴ ॥ ४ ॥ 〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰 १. (घ) १. दृग्दणितैक्यं (च) for (दृग्गणितैक्यं) (ग) ३. तस्माद्यथा for (यस्माद्यथा) (क) २. 'न' पद लुप्त है । ३. तस्माद्यथा for (यस्माद्यथा) २. (घ) १. वित्रिग्नसमे for (वित्रिभलग्नसमे) २. द्योदक् (ग) ज्योदग (क) ज्यादक् for (ज्योदक्) (ग) ३. तत्स्वक्रांति (क) तन् खक्रान्ति for (तत्संकान्ति) (च) ४. र्के न for (ऽर्केन) ३ तत्सक्रांतिस्योदक् for (तत्संकान्तिज्योदक्) ३. (घ) १. स भवे तदुदयै (ग) संभवेत्तदुयै (क) संभवेत्तदुदयै for (संभवेत्तदुदयै) २. विलग्न समं for (विलग्नसमं) ३. घटिकात्तर्छंकुस् (ग) घटिकास्त छंकुं (क) घटिकास्तच्छंकुस् for (घटिकातः छंकुस्) (क) ५. 'कृत्वा' यह पद पूर्वार्ध का अंतिम न होकर उत्तरार्ध का आरम्भिक है (च) ४. (घ) १. कृतेश्चतुर्गुण (ग) कृतेश्चतुर्गुणं १०६६२६०० for (कृते चतुर्गुणं) २. हृताया (ग) हृतायाः (च) हृताया for (हताया) ३. राशित्रं for (राशित्र) ४. लग्नांन्तरज्यायाः (च) for (लग्नान्तरज्यायाः) (क) १. कृतेः रचतुर्गुण for (कृते चतुर्गुण) (च) १. कृतेश्चतुर्गुण for (कृतेचतुर्गुण)

( ७६ ) लम्बनघटिकालग्नात् तात्कालिकात्त्रिराश्यूनात् । ऋणं (ऋणं) अधिके ऽर्के हीने धनमसकृत्पंच दृश्यन्ते ॥ ५ ॥ करणं गुणाद् व्यासाद्धर्द्धिसुवेद ४८ विभाजिता फलविभक्त । लम्बननाड्यो भास्करवित्रिभलग्नान्तरं वा ॥ ६ ॥ रविशशिपातगतिकला लम्बनघटिका गुणेष्वष्टा । यदि लम्बनमृणमूना धनमधिकाः स्वफललिप्ताभिः ॥ ७ ॥ अक्षज्याया वित्रिभलग्नात्स्वक्रान्तिरुत्तरार्कस्य । इन्दोर्वा यद्यधिका न नतिः सौम्या ऽन्यथा याम्या ॥ ८ ॥

५. (घ) १. लब्धं लंबन (ग) लब्धं लंबन् (च) for (लम्बन)
२. ऋणमधिके (ग) ऋणमधिकेऽर्के हीने (क) ऋणमधिकेऽर्के हीने for (ऋणं
अधिकेऽर्के हीने )
३. ससकृत्पंच (क) मसकृत्यं च for (मसकृत्पंच)
४. दृश्यंते (क) दृश्यन्ते (च) दृश्यंते for (दृश्यन्ते)
(क) १. लब्धं लंबन for (लम्बन)
(च) ५. राशनात् for (राश्यूनात्) १ ऋणमधिकेकें for ऋणं अधिकेऽर्के)
६. (घ) १. विभाजितात्पलविभक्ता (ग) विभाजितात्फलविभक्ता (क) (च) for
(विभाजिता फलविभक्त)
२. लंबतन्याडचो for (लम्बननाड्यो)
३. वित्रिवजग्नांतर (ग) वित्रिलग्नांतर (क) बित्रिभलग्नांतर for वित्रिभल-
ग्नांतरं)
४. धावा (ग) ज्यावा (क) ज्यावा for (वा)
(च) ४. लग्नांतरंवावा for (लग्नांतरं वां)
७. (घ) १. गुणाङ्कृता-गुणा हृता (ग) (क) गुणाकृता षष्ट्या for (गुणेष्वष्टा)
(ग) २. शशिपातागति for (शशिपातगति)
३. स्वफललिप्तानिः for (स्वफललिप्ताभिः)
(च) १. गुणा हृताषष्ट्या for (गुणेष्वष्टा)
८. (घ) १. अक्षय्याया (ग) अक्षछाया for (अक्षज्याया)
२. अवनतिः (ग) (क) स्वनतिः for (ननतिः)
(क) ४. स्वाक्रान्ति for (स्वक्रान्ति)
(च) ३. वनतिः for (ननतिः)
५. अवग्रहचिह्न लुप्त

( ८० ) वित्रिभलग्नादुत्तरदक्षिण¹विक्षेपहीनसंयुक्तम् । शंधुधुनुरुत्तरायामधिकोनं दाक्षणावनतौ² ॥ ६ ॥ तज्ज्येंदु (तज्जेंदु) शंकुराद्यः सवितुः दृक्षेप¹ मंडले युक्तं । अपमण्डलेन भानोश्चन्द्रस्य विमण्डलेन युते ॥ १० ॥ त्रिज्या वर्गावूनौ¹ स्वशंकुवर्गेण तत्पदे हग्ज्ये । रविशशिमध्यगतिगुणे तिथिगुणितव्यासदलभक्तं ॥ ११ ॥ ४६०५०³ स्वछायागुणिते⁴ वा मध्यगतितिथिगुणस्वकर्णाह्ते । फलयोर्दिक् याम्येतर²मवनतिरैक्यं दिगन्यत्वे ॥ १२ ॥ संयोगान्तरमवनतिशशांकविक्षेपयोः सामान्यदिशोः¹ । स्फुट²विक्षेपः शशिवत्³ स्थित्यर्द्धं⁴ विमर्दद्दलनाडचः⁵ ॥ १३ ॥ प्राग्वल्लम्बनमसकृत्तिथ्यांतात्¹ स्थितिदलेन हीनयुतात् । अधिकोनं तन्मध्या ऋणयो²रूनाधिकं धनयोः ॥ १४ ॥

९. (घ) १. दक्षण for (दक्षिण)
२. दक्षिणावनतो (ग) (क) दक्षिणावनतौ for (दाक्षणावनतौ)
(च) १. दक्षण for (दक्षिण) २ दक्षिणावनतो for (दाक्षणांवनतो)
१०. (घ) १. दृक् (क) दृक्षेप for (दृक्षेप)
(च) १. दृंक्षेप for (दृक्षेप)
११. (घ) १. वर्गातूनी (ग) वर्गातूनी (क) वर्गाबूनौ for (च) वर्गावूनौ (वर्गाबुनौ)
१२. (घ) १. गती (ग) (क) for (गति)
२. साम्येंतर (ग) साम्येतर (क) साम्येऽन्तर for (याम्येतर)
(ग) ३. यह संख्या इस प्रति में अंकित नहीं है ।
४. स्वच्छया (क) तच्छाया for (स्वछाया)
१३. (घ) १. समान्यदिशोः (ग) (क) समान्यदिशोः (च) for (सामान्यदिशोः)
२. स्फुटिविक्षेपः for (स्फुट विक्षेपः)
३. शशिन for (शशिवत्)
(ग) ४. स्थित्यर्द्ध (क) for (स्थित्यर्द्धं)
(च) ३. शशिव for (शशिवत्)
५. विमर्द for (विमर्द)
१४. (घ) १. असकृत्तिथ्यंतात् (ग) (च) for (असकृत्तिथ्यांतात्)
२. मध्याहृणयो (ग) (क) मध्याहृणयो (च) for (मध्याऋणयो)