भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 476

( ६० ) <sup></sup>दृग्गलग्न दृष्टिभाग <sup></sup>ग्रहोदयास्तमयनाडिकाद्येषु । <sup></sup>मया<sup></sup>ध्यायः चतुर्दश<sup></sup>भिरार्याभिः ॥ १४ ॥ <sup></sup>इत्ति ब्रह्मगुप्ते षष्ठोऽध्यायः । १४. (घ) इसकी क्रमसंख्या १२ है (ग) १. दृल्लग्न दृष्टिभाग (ग) दृग्लग्नद्विदृष्टिभाग for (दृग्गलग्न दृष्टिभाग) २. उदयास्तमयाध्यायः षष्ठो (ग) (क) उदयास्तमयो for (मयाध्यायः) ३. द्वादशभिरार्याभि । द्वादशभिरार्याभिः । for (चतुर्दशभिरार्याभिः) ५. 'इति' से 'अध्यायः' तक मूल प्रति में नहीं है । केवल समाप्तिसूचक “छः” चिन्ह है । (क) ६. ऽध्यायाषष्टो द्वादशाभिरा र्याभिः for (अध्यायः चतुर्दशभि रायाभिः ।।१४।।) (च) २. उदयास्तमयाध्यायः षष्ठो for (मयाध्यायः) ३. द्वादशभि for (चतुर्दशभि) ४. 'इति' से 'अध्यायः' तक लुप्त है ।