ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( ६१ ) सितवृद्धि⁶ हानिर्वा यदि शापाज्जायते¹ कथं⁵ गणितात्² । उपरि खेरिन्दुश्चेदंधांगधं³ सदा शुक्लां⁴ ॥ १ ॥ रविद्रष्टं¹ सितमर्द्धं² कृष्णमहदृष्टं³ यथा तपस्थ्यस्य⁵ । कुम्भस्य तथासन्नं खेरर्धस्थ्यस्य⁴ चन्द्रस्य ॥ २ ॥
(घ) १. (ग) शापात् ज्ञायते for (शापाज्जायते)
५. कथं (ग) 'अनंकित' है for (कथम)
३. दर्वागधं (ग) for (दंधांगधं)
४. शुक्लम् (ग) for (शुक्लां)
(ग) २. गणितान् for (गणितात्)
(च) ५. कथं for (कथम)
३. चेदर्वागद्धं for (चेदंधांगधं)
(क) १. २. गणितान् for (गणितात्)
३. दर्वांगद्धं for (दंधांगधं)
४. शुक्लं for (शुक्लां)
६. वृद्धिहानि for (वृद्धिहानि)
२. (घ) १. दृष्टं (ग) द्रिष्टं for (द्रष्टं)
४. रघस्थ्यस्य (ग) for (रर्धस्थ्यस्य)
(ग) ३. मकृष्णं for (महदृष्टं)
५. तस्य for (थस्य)
(च) १. दृष्टं for (द्रष्टं)
(क) १. दृष्टं for (द्रष्टं) २. शितमद्धं (सितमर्द्धं) ३. दृश्यं for (दृष्टं) ४.
रघः for (रर्ध)