ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( १०७ ) एवं मानैक्यार्द्धादधिके मध्यांतरे युतिर्ग्रहयोः । स्थित्यर्द्धविमर्द्ददले हीनेतरा ग्रहेंदुयुतौ ॥ १८ ॥ लम्बनमर्कग्रहणवदसकृत्स्वावनतिलिप्तिकास्पष्टौ । तात्कालिकविक्षेपौ तदन्तरैक्यं समान्यदिशोः ॥ १६ ॥ विक्षेपो मध्यान्तरमुर्ध्वस्वच्छादको ग्रहोऽधस्थः । मानैक्यार्द्धादधिके नातिस्पष्टास्फुटोक्तिरतः ॥ २० ॥ १८. (घ) ३. ताराग्रहेंदुयुतौ (ग) for (ताराग्रहेन्दुयुतौ) (ग) ४. युतिग्रहयोः for (युतिर्ग्रहयोः) (च) ५. विमर्द्द for (विमर्द) (क) १. दधि for (दधिके) २. स्थित्यर्थ for (स्थित्यर्द्ध) ३. तारा for (तरा) १६. (घ) ३. तदन्तरेक्यम् for (तदन्तरैक्यम्) (ग) ४. लिप्ता for (लिप्तिका) (च) ५. मक्र्क for (मर्क) (क) १. वत् for (वद) २. दश कृत for (दसकृत्) ३. तदन्तारेक्यम् for (तदन्तरैक्यम्) २०. (घ) १. मूर्ध स्वच्छादको ग्रहोधरथः (ग) मूर्धस्य छादको ग्रहोधस्थः for (मुर्ध्वस्वच्छादको ग्रहोऽधस्थः) (च) १. मूर्द्ध for (मुर्ध्व) २. धस्थ for (ऽधस्थः) (क) १. मूर्धस्य for (मुर्ध्वस्य) २. ऽधः स्थः for (ऽधस्थः)