ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( १०६ ) ऋणमूनं धनमधिकं स्वोदयलग्नात् समेस्तलग्नं¹ चेद्भक्ताः⁴ । भक्ता स्तन्दरकलाः² पृथक् पृथक् स्व³दिननाडीभिः ॥ १४ ॥ ऋणयोर्वा³ धनयोर्वान्तरेण¹ मुत्या²धनर्णयोर्भक्ताः । अन्तरलिप्ताः⁴ स्वोदय⁵विलग्नयोर्लब्धघटिकाभिः ॥ १५ ॥ उदयास्तविलग्नान्तरकलागुणाः स्वदिननाडिका² भक्ताः । लब्धकलादिकमूनं¹ स्वास्त विलग्नादुदयलग्नम् ॥ १६ ॥ यद्यधिकमूनमेवं समलिप्तौ स्वोदयाद्युतौ गृहयोः । रात्रिविलग्नादूनावधिकौ षड्ग्रहहृश्यौ¹ ॥ १७ ॥
१४. (घ) १. स्वमस्त for (समस्त)
२. तदंतरकलाः for (तन्दरकलाः)
(ग) ३. 'स्व' यह पद यहाँ अंकित नहीं।
(च) ४. 'भक्ताः' द्वितीय पंक्ति का "भक्तास्" रूप में आरंभिक शब्द है।
२. भक्तास्तदन्तर कलाः for (भक्तास्तन्दरकलाः)
'क' २. स्वमस्त for (समस्त)
(ग) २. तदंतर कालाः for (तन्दरकलाः)
१५. (घ) ३. वोधनयो for (वर्धिनयो)
२. युत्या (ग) युत्तचा for (मुत्या)
(ग) ४. अन्तरलिप्ता for (अन्तरलिप्ताः)
५. स्वाद for (स्वोदय)
(च) ३. र्वोधनयो for (वर्धिनयो)
१. वांतिरेण for (वान्तरेण)
२. युत्या for (मुत्या)
(क) १. र्वन्तिरेण for (वान्तरेण) २. युत्तचा for (मुत्या)
१६. (घ) २. नाडिकभक्ताः for (नाडिका भक्ताः)
१. लब्धकलाधिकमूनं (च) for (लब्धकलादिकमूनं)
(क) २. कलाधिकमूनं (कलादिकमूनं)
१७. (घ) १. षड्गृहयुताद् (ग) षड्गृहायुता for (षड्ग्रहा)
(च) १. षड्ग्रहयुता for (षड्ग्रहा)
(क) १. षड्ग्रहयुता for (षड्ग्रहा)