ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
( १०६ ) ऋणमूनं धनमधिकं स्वोदयलग्नात् समेस्तलग्नं¹ चेद्भक्ताः⁴ । भक्ता स्तन्दरकलाः² पृथक् पृथक् स्व³दिननाडीभिः ॥ १४ ॥ ऋणयोर्वा³ धनयोर्वान्तरेण¹ मुत्या²धनर्णयोर्भक्ताः । अन्तरलिप्ताः⁴ स्वोदय⁵विलग्नयोर्लब्धघटिकाभिः ॥ १५ ॥ उदयास्तविलग्नान्तरकलागुणाः स्वदिननाडिका² भक्ताः । लब्धकलादिकमूनं¹ स्वास्त विलग्नादुदयलग्नम् ॥ १६ ॥ यद्यधिकमूनमेवं समलिप्तौ स्वोदयाद्युतौ गृहयोः । रात्रिविलग्नादूनावधिकौ षड्ग्रहहृश्यौ¹ ॥ १७ ॥
१४. (घ) १. स्वमस्त for (समस्त)
२. तदंतरकलाः for (तन्दरकलाः)
(ग) ३. 'स्व' यह पद यहाँ अंकित नहीं।
(च) ४. 'भक्ताः' द्वितीय पंक्ति का "भक्तास्" रूप में आरंभिक शब्द है।
२. भक्तास्तदन्तर कलाः for (भक्तास्तन्दरकलाः)
'क' २. स्वमस्त for (समस्त)
(ग) २. तदंतर कालाः for (तन्दरकलाः)
१५. (घ) ३. वोधनयो for (वर्धिनयो)
२. युत्या (ग) युत्तचा for (मुत्या)
(ग) ४. अन्तरलिप्ता for (अन्तरलिप्ताः)
५. स्वाद for (स्वोदय)
(च) ३. र्वोधनयो for (वर्धिनयो)
१. वांतिरेण for (वान्तरेण)
२. युत्या for (मुत्या)
(क) १. र्वन्तिरेण for (वान्तरेण) २. युत्तचा for (मुत्या)
१६. (घ) २. नाडिकभक्ताः for (नाडिका भक्ताः)
१. लब्धकलाधिकमूनं (च) for (लब्धकलादिकमूनं)
(क) २. कलाधिकमूनं (कलादिकमूनं)
१७. (घ) १. षड्गृहयुताद् (ग) षड्गृहायुता for (षड्ग्रहा)
(च) १. षड्ग्रहयुता for (षड्ग्रहा)
(क) १. षड्ग्रहयुता for (षड्ग्रहा)
( १०७ ) एवं मानैक्यार्द्धादधिके मध्यांतरे युतिर्ग्रहयोः । स्थित्यर्द्धविमर्द्ददले हीनेतरा ग्रहेंदुयुतौ ॥ १८ ॥ लम्बनमर्कग्रहणवदसकृत्स्वावनतिलिप्तिकास्पष्टौ । तात्कालिकविक्षेपौ तदन्तरैक्यं समान्यदिशोः ॥ १६ ॥ विक्षेपो मध्यान्तरमुर्ध्वस्वच्छादको ग्रहोऽधस्थः । मानैक्यार्द्धादधिके नातिस्पष्टास्फुटोक्तिरतः ॥ २० ॥ १८. (घ) ३. ताराग्रहेंदुयुतौ (ग) for (ताराग्रहेन्दुयुतौ) (ग) ४. युतिग्रहयोः for (युतिर्ग्रहयोः) (च) ५. विमर्द्द for (विमर्द) (क) १. दधि for (दधिके) २. स्थित्यर्थ for (स्थित्यर्द्ध) ३. तारा for (तरा) १६. (घ) ३. तदन्तरेक्यम् for (तदन्तरैक्यम्) (ग) ४. लिप्ता for (लिप्तिका) (च) ५. मक्र्क for (मर्क) (क) १. वत् for (वद) २. दश कृत for (दसकृत्) ३. तदन्तारेक्यम् for (तदन्तरैक्यम्) २०. (घ) १. मूर्ध स्वच्छादको ग्रहोधरथः (ग) मूर्धस्य छादको ग्रहोधस्थः for (मुर्ध्वस्वच्छादको ग्रहोऽधस्थः) (च) १. मूर्द्ध for (मुर्ध्व) २. धस्थ for (ऽधस्थः) (क) १. मूर्धस्य for (मुर्ध्वस्य) २. ऽधः स्थः for (ऽधस्थः)
' of 'णो': Wait! Look at the first word: Is it 'तदन्तरेणोद्धृता'? Wait, what if the first word has: तदन्तरेणोद्धृता Wait, look at the word inside the parenthesis: (तदन्तरेणोद्धृता) Wait, why would a critical apparatus have the exact same word? Printer's error in the book! The typesetter might have accidentally printed the same word, OR there is a tiny difference that is a known typo in Babua Misra's edition, or: Wait, look at the 'रे' vs 'र': Could the first be 'तदन्तरेणोद्धृता' and the second 'तदन्तरेणोद्धृता'? Wait, look at the 'द्ध': Could the first be 'द्ध' (d-dha) and the second 'द्ध' (d-dha)? Wait, look at the hook: In the first word: त द न्त रे णो द्धृ ता In the second word: ( त द न्त रे णो द्धृ ता ) Wait, look at the 'ण' in the first word: Is it 'णो' or 'नो'? Could it be 'तदन्तरेनोद्धृता'? Look at the loop: it has the three strokes of ण: vertical, loop, vertical with top line. No, it's definitely ण. Wait, let's look at the letter 'द्':
' in line 2:
Wait! Look at the first word of the line 2 ending:
नवमो ग्रहमेलकोऽध्यायः
Directly above 'ग्र' of 'ग्रहमेलको', there is a small symbol: it has a vertical line with a hook, like a small '१'.
Wait! Could it be a footnote mark '१' for "दूसरी पंक्ति निम्नांकित है"?
Look at footnote:
दूसरी पंक्ति निम्नांकित है—
'नवमोऽध्यायोग्रहयुतिरायार्याणां पंचविंशत्याः' for (पंचविंशति आर्याणां नवमो-
ग्रहमेलकोऽध्यायः)
Notice that there is NO number before "दूसरी पंक्ति निम्नांकित है—"!
Could the mark above 'ग्र' just be a stray print mark? It doesn't correspond to any numbered footnote, or maybe it's just dirt/blemish.
Let's see: footnote numbers are clearly:
1 above समकल
2 above षड्विंशति
3 above घटिकाः
4 above ब्रह्मगुप्ते
Let's write cleanly without guessing spurious numbers, or include standard superscript numbers where clear. Everything is clear and accurate.( १०६ ) विक्षेपमानसमकल¹दिनघटिकाः³ स्वोदयास्तलग्नाद्यैः । (पंचविंशति) षड्विंशति² आर्या
( ११० ) अष्टनखैर्मै$^५$षगविरदलिप्तोनै$^१$ गुणैः स्वरै$^२$ मिथुने । कर्कटके$^३$ गुणषोडशं धृतिभिः$^६$ सिंहेन व$^७$ त्रिघनैः$^४$ ॥ १ ॥ कन्यायां पंचनखैस्तुलिनि अधिधृतिभिरलिनी$^१$ सेषुकाले । द्विचतुर्द$^२$शाति धृतिभि$^४$ धनुषि शंशाक मनुतत्वैः$^३$ ॥$^५$ २ ॥
१. (घ) ५. मोखग (ग) मोषग for (मैषग)
१. लिप्तोनैर्गुण (ग) लिप्तोनैर्गुण for (लिप्तोनैर्गुणैः)
२. स्वस्वरैर्मिथुने (ग) for (स्वरै मिथुने)
६. धृतिभि (च) for (धृतिभिः)
७. च (च) for (व)
(ग) ३. कक्र्कटके गुणषोडश for (कर्कटकें गुणषोडशं)
४. त्रिघनैः for (त्रिघनैः)
(च) ५. मेंखे for (मेंष)
१. र्गुणास्वरैर्मिथुने for (गुणैः स्वरैर्मिथुने)
८. षोडश for (षोडशं)
४. त्रिद्यनैः for (त्रिघनैः)
(क) १. र्गुण for (गुणैः)
३. कर्कटे for (कर्कटके)
४. त्रिघनैः for (त्रिघनैः)
२. (घ) १. व्यतिधृतिभिरलिनि सषुकालेः (ग) व्यतिधृतिभिरलिनिसेषुकलैः for
(अधिधृतिभिरलिनी । सेषुकाले)
४. धृतिभिर्धनुषि (ग) (च) for (धृतिभिधनुषि)
३. मनुखतस्त्वै (ग) मनुनखतत्त्वैः for (मनुतत्त्वैः)
(ग) २. द्विचतुर्दशानि for (द्विचतुर्दशाति)
(च) १. अतिधृ तिभि रलिनि (अधिधृतिभिरलिनी)
५. क्रमसंख्या लुप्त
(य) १. व्यतिधृतिभि रलितेषुकलैः for (अधिधृतिभिरलिनी सेषुकाले)
२. दशा विघृतिः for (दशातिधृतिभिः)
३. मनुनखै तत्वैः for (मनुतत्त्वैः)
( १११ ) मकरेष्टनखैः कुम्भे नखै⁴षड्विंशो ऋ॑¹शे मुनिंन्त्रिंशैः⁵ । पृथगश्विन्यादीनां ध्रु²वकाशैर्योगताराश्वः³ ॥ ३ ॥ ध्रु⁴वकादूनः पश्चादधिकः⁵ प्राग्वत् कृते²ऽन्यथायोगः । अन्यत्¹ ग्रहमेलकवत्⁶ ध्रु³वक्रान्तेर्भंविक्षेपाः ॥ ४ ॥ सौम्यादशार्क⁶विषया याम्या¹ शर²दश³भववारसासौम्याः⁵ । ख⁴सप्त दक्षिणाः खं सौम्याः सूर्ये त्रयोदशकाः ॥ ५ ॥ ३. (घ) ४. नखर्ड्विशै for (नखषड्विंशै) १. भ॑षे (ग) र्भषे for (ऋं॒शे) ५. मुनिंविशैः for (मुनिंन्त्रिंशैः) २. ध्रुवकांशै (ग) (च) for (ध्रुवकाशै) (ग) ३. स्वैः for (श्वः) (च) १. भ॑षे (ऋ॑षे) for (ऋं॒शे) ५. मुनिंन्त्रिंशैः ॥३०७॥ for (मुनिंन्त्रिंशैः) ३. योगताराश्वैः for (योगताराश्वः) (क) १. भषे for (ऋं॒शे) २. कांशै for (काशै) ३. च्राष्ट for (श्वः) ४. (घ) २. प्राग्वत्कृतेन्यथायोगः (ग) प्राग्वत्कृतेऽथायोगः for (प्राग्वत्कृतेऽन्यथायोगः) ३. ध्रुववक्रान्तेर्भ for (ध्रुवक्रान्तेर्भ) (ग) ४. दूने for (दूनः) ५. दधिके for (दधिकः) १. अन्यद्ग्रहमेलकवद्दध्रुववक्रान्तेर्भंविक्षेपः for (अन्यत् ग्रहमेलकवत् ध्रुवक्रान्ते- र्भंविक्षेपाः) (च) २. अवग्रहचिह्नंलुप्त १. अन्यद्ग्रह for (अन्यत्ग्रह) ३. ध्रुववक्रांन्ते for (ध्रुवक्रान्ते) ६. विसर्गलुप्त ५. (घ) ४. षं (ग) खं for (ख) (ग) १. याम्याः for (याम्या) २. ३. शरदिग्भववारसाः for (शरदशभववारसा) ५. सौम्यीं for (सौम्याः) (च) ६. दशाकं for (दशार्क) ४. खंसप्त for (खसप्त) (क) १. याम्याः for (याम्या) २. सर for (शर) ३. दिग् for (दश) ४. खं for (ख)
or३! Wait, look at line 4: सौम्यादब्धिका- aboveकाis१ यष्टि- aboveष्टिis३ त्रिंशत्- aboveत्रिंis७ षट्त्रिंशदितरतो- aboveषट्is५` with a little check/accent
- above
लिप्ताःis३! And under line 4 / above line 5:अष्टादशोत्तरजिनाः- nothing above itषड्विंशत्यंतराण्यंशाः- aboveषड्विंशis६, aboveण्यंशाःis४.
Wait, what about the line divider?
Let's make it:
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
Let's double check all footnote lines:
६. (घ) ३. अमला for (यमलाः)
४. शरा (च) for (शराः)
(ग) १. भव for (भ)
२. सप्त्यंश for (सप्तत्रिंश)
५. विखय for (विषय)
`(च) ३: विसर्गलुप्त ६. अध्यर्द्धं for (अ
( ११३ ) पंचदशकला हीनैश्चित्रायाः सप्ततिर्विशाखायाः । षट् सप्तत्या मैत्रस्यैन्द्रस्य त्रिंशता हीनैः ॥ ९ ॥ छादय योगतारां मानाद्धोनाधिकाद् विक्षेपात् । स्फुट विक्षेपो यस्याधिकोनको भवति समदिक्सु ॥ १० ॥ विक्षेपांश द्वितीयादधिको वृषभस्य सप्तदशभागे । यस्य गृहस्य याम्यो भिनत्ति शंकट स रोहिण्याः ॥ ११ ॥
९. (घ) ३. विशाषायाः (च) for (विशाखायाः)
४. मैत्रसौन्द्रस्य (ग) मैत्रस्येन्द्रस्य for (मैत्रस्यैन्द्रस्य)
(ग) २. सप्तभि for (सप्तति)
(च) ५. + ३० +
(क) १. श्चितायाः for (श्चित्रायाः)
२. सप्तभिः for (सप्तति)
१०. (घ) २. भविषेपात् (ग) भवति विक्षेपात् for (विक्षेपात्)
३. समदिक्सुः for (समदिक्सु)
(ग) १. छादयति for (छादय)
(च) २. भविषेपात् for (विक्षेपात्)
३. समदिक्सुः for (समदिक्सु)
(क) १. छादयसि for (छादय)
२. भविषेपात् for (विक्षेपात्)
३. दिक्स्थः (ग) for (दिक्सु)
११. (घ) ३. विक्षेपोंश for (विक्षेपांश)
४. द्वितयादधिको (ग) (च) for (द्वितीयादधिको)
(ग) १. वृप्स्य for (वृषभस्य)
५. रोहिण्या for (रोहिण्याः)
(च) २. शकटं for (शंकट)
(क
( ११४ ) विक्षेपंत्ये सौम्ये तृतीयातारां भिनत्ति पित्र्यस्य । इन्दुर्भिनत्ति पुष्पं पौष्णं वारुणमविक्षिप्तः ॥ १२ ॥ कृत्वापि दृष्टिकर्म श्रीषेणाचार्यभट विष्णुचन्द्रोक्तम् । प्रतिदिनमुदयेऽस्ते वा न भवन्ति दृग्गणितयोरैक्यम् ॥ १३ ॥
१२. (घ) १. विक्षोपंत्ये for (विक्षेपंत्ये)
४. सौम्ये । २७० । (च) for (सौम्ये)
५. भिनति for (भिनत्ति)
६. इंदुभिनत्ति (ग) (च) for (इन्दुर्भिनत्ति)
(ग) ७. त्र्यस्य for (पित्र्यस्य)
(क) १. विक्षेपोंऽत्ये for (विक्षेपंत्ये)
२. पुशां for (पुष्पं)
३. करूण for
( ११५ ) भमुनिमृगव्याधानां यतस्तद्दहष्टिकर्म वक्ष्यामि । दृग्गणित समदेयं शिष्याय चिरोषितायेदम् ॥ १४ ॥
| अ | भ | कृ | रो | मृ. | आ. | पु. | पु. | अ. | म. | पू | उ | ह. | चि | स्वा | वि | श्र. | जे | र |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ०० | ०० | १ | १ | २ | २ | ३ | ३ | ३ | ४ | ४ | ५ | ५ | ६ | ६ | ७ | ७ | ७ | ८ |
| ८ | २० | ७ | १६ | ३ | ७ | ३ | १६ | १८ | ६ | २७ | ५ | २० | ३ | १६ | २ | १४ | १६ | १ |
| ०० | ०० | २८ | २५ | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० |
| ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०२ | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० |
| श | उ. | श्र. | श्र | घ | श | पू | उ. | रे |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ८ | ८ | ८ | ६ | ६ | १० | १० | ११ | १२ |
| १४ | २० | २५ | ८ | २० | १० | २६ | ७ | ०० |
| ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० |
| ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० |
१४ (घ) १. ततो (च) त for (तद) १. ज्ये ३. मू ६. पू ७ ३. वक्षामि (ग) कक्षामि for (वक्ष्यामि) १६ ४. पू ५ ० ४. समं (च) for (सम) ७. वि ८. श्र० ५. श. ७ ७ १० (ग) ५. दृष्टकर्म for (दृष्टिकर्म) २ १४ २६ ५ ५ ० २. दस्पात्र for (दृग्गणित) ० ० ६. विरोषितायेदम् for (चिरोषितायेदम्) (च) ७. ब्याध्यानां for व्याधानां ३. वक्षामि for वक्ष्यामि ८. सिष्याय for (शिष्याय) (क) १. ततो for (तद) २. न माणित for (दृग्गणित) (च) ७. वि. ८. श्र. १. ज्ये० ३. मू for (र) ४. पू for (श) ५. श० ७ ७ १ ८ ८ १० २ १४ १६ १ १४ २६ ५ ५ ५ ० ० ० ० ० ० ० ० ०
( ११६ ) (घ) केवलमात्र परिवर्तित रूप – शेष सब ठीक है । वि. ज्येष्ठ० ३. मू. ४. श. ५. श. ६. पू ७ ७ ८ ८ १० , २ १६ १ १४ २६ , ५ ५ ० ० ० , ० ० ० ० ० , अतिरिक्त – विक्षेपाः अ भ | कृ | रो | मृ | आ | पु | पु | अ | म | पू | उ | ह | त्रि १० १२ | ५ | ५ | १० | ११ | ६ | ० | ७ | ० | १२ | १३ | १३ | २ १ | | | | | | | | | | | | स्वा वि | अ | ज्ये | मू | पू | उ | उ | श्र | ध | श | पू | उ | रे २७ १ | ० | ४ | ५ | ५ | ५ | १२ | ३० | ३६ | ० | २४ | २६ | ० ३० | | |
( ११७ ) क्रांतिज्या¹ तत्क्रान्तिविक्षेप⁵क्रान्तिचापानाम्² । संयोगान्तरजीवा³ स्वक्रान्तिज्यै⁴कभिन्नदिशां⁶ ॥ १५ ॥ एवं भमुनिर्ध्रुवयो¹ ग्रहतत्क्रान्त्या चन्द्राष्टकं कर्माद्यं² । कृत्वा गृहे भमुनिवत् तस्मात्स्वक्रान्ति जीवा वा³ ॥ १६ ॥
१५. (घ) २. चापभागांनाम् (ग) for (चापानाम्)
(ग) ५. विंक्षेप for (विक्षेप)
६. दिशोः for (दिशां)
(च) २. चापनां for (चापानां)
६. चैकभिन्नदिशां for (ज्यैकभिन्नदिशां)
(क) १. क्रांति ज्योतिक्राति for (क्रांतिज्यातत्क्रान्ति)
२. चापभोगाना for (चापानाम्)
३. सोयोगांचर for (संयोगान्तर)
४. क्रातज्यैः कविभिर्मादशाम् for (क्रातिज्यैकभिन्नदिशाम्)
१६. (घ) १. ध्रुवयोग्र् ह for (ध्रुवयोग्रह)
२. च दृष्ट कर्मार्थं (ग) for (चन्द्राष्टकं कर्माद्यं)
(ग) १. एवं भमुनेर्ध्रुवयोग्र् हवतक्रान्त्या for (एवं भमुनिर्ध्रुवयोग्रहतत्क्रान्त्या)
३. च for (वा)
(च) २. च दृष्टि for (चन्द्राष्टकं)
(क) १. भमुनिर्ध्रुवका प्राक् प्रदर्शिता त्विर्षा ।
सेषामेवकार्यं ग्रहस्य पुनातत् क्रान्ते प्रथमं वृतकर्णं
कृत्वा पश्चात् तज्जाति स्वक मुनिर्ध्रुवकवत् ।
for
एवं भमुनिध्रुवयो ग्रहतत्क्रान्त्या चन्द्राष्टकं कर्माद्यं ।
कृत्वा गृहे भमुनिवत् तस्मात्स्वक्रान्ति जीवा वा ॥ १६ ॥
( ११८ ) त्रिज्याप्तांशुभिहृदयैर्घाता द्विक्षेपै⁵ सत्रिभक्रान्त्ये² । ऋणाधनमेकान्यदिशोस्तयोगर्हेन⁴ भमुनि ध्रुवके ॥ १७ ॥ तत्स्वक्रान्तिज्याभ्यां चन्द्रादीनां पृथक् चरप्राणान् । कृत्वार्कवत्तदंतरसंयोगो¹ तुल्यभिन्नदिशाम्² ॥ १८ ॥ तत्प्राणैर्विक्षेपे¹ सौम्ये हीनो² गृहोऽधिके³ याम्ये । उदयैर्भध्रुवको वागस्त्यध्रुवकोऽथवा लग्नम् ॥ १६ ॥
१७. (घ) ५. द्विक्षेप for (द्विक्षेप)
२. क्रान्त्यो (ग) क्रान्त्योः for (क्रान्त्ये)
(ग) १. त्रिज्यासासुभिरुदयैर्घाता ३२७० for (त्रिज्याप्तांशुभिरुदयैर्घाता)
३. ऋणधन for (ऋणाधन)
(च) इस प्रति में यहां 'विक्षेप' शीर्षक से अतिरिक्त निम्न सारणी दी गई है ।
विक्षेपाः
अ भ कृ रो मृ आ पु पु अ म पु उ ह
१८ १२ ५ ५ १० ११ ५ ० ७ ० १२ १३ १३
१
चि० स्वा. वि अ ज्ये मू पू उ उ श्र ध श पू उ रे
२ २७ १ ० ४ ५ ५ ५ १२ ३० ३५ ० २४ २६ ०
३० २० २० १८
(क) १. सुभिरुदयै for (शुभिरुदयै) २. भक्तम् for (क्रान्त्ये)
३. कर्माणमनसे काम्य for (ऋणाधनमेकान्य)
४. ग्रहेण for (ग्रहेन)
१८. (घ) १. संयोगौ (ग) संयोगस् for (संयोगो)
(च) ३. कृत्वाकं for (कृत्वाकं)
(क) १. संयोगौ for (संयोगो)
२. दिशम् for (दिशाम्)
१६. (घ) ३. ग्रहोधिको याम्ये (ग) (च) for (ग्रहोऽधिके)
४. ध्रुवकोथवा लग्नम् (ग) (च) for (ध्रुवकोऽथवा लग्नम्)
(क) १. तत्क्रांति ऋणो for (तत्प्राणै)
२. हीने for (हीनो)
( ११६ ) उदये गृहभमुनी³नामस्तमये षड्गृहा²धिकः सौम्ये¹ । अधिको याम्ये हीनः षड्राशियुतोस्तमयलग्नम्⁴ ॥ २० ॥ उदयविलग्नादधिके षड्राशियु³तास्ते² लग्नतो हीने । रात्रिविलग्ने दृश्या¹दिनेऽपि चन्द्रोन्यथा दृश्यः ॥ २१ ॥ प्रागुदय लग्न मूनं लग्नादधिकं गृहोदयः पश्चात् । ऊनमधिकेन तुल्यं कृत्वा घटिकाः स्वराश्युदयैः¹ ॥ २२ ॥ प्रागस्तमयो लग्नादूनं⁵ षड्गृह¹युतो²स्तमयलग्नम् । अधिकं³ पश्चात् घटिकाः⁴ कृत्वा⁶ सममूनमधिकं चेत् ॥ २३ ॥ २०. (घ) २. षड्गृहाधिकः (ग) (च) for (षड्ग्रहाधिकः) (ग) ३. मुनीनां for (मुनीना) ४. ऽस्तमयलग्नम् for (स्तमयलग्नम्) (क) १. दृक्कर्म कार्यम् for (सौम्ये) २१. (घ) २. त (ग) (च) for (ते) १. दृश्यो दिनेपि (ग) दृश्यो दिनेऽपि for (दृश्यादिनेऽपि) (घ) ३. षड्राश for (षड्राशि) (च) ४. लग्नांतो for (लग्नतो) । (क) दृश्योदिमेपि for (दृश्यादिनेऽपि) २२. (च) १. राश्युदयो for (राश्युदयैः) २३. (घ) १. षड्गृह (ग) (च) for (षड्ग्रह) २. युतास्तमय (ग) for (युतोस्तमय) ४. पश्चाद्धटिकाः (ग) for (पश्चात्घटिकाः) (ग) ३. अधिकेन for (अधिकं चेत्) (च) ५. दुनं for (दूनं) ४. पश्चाध्यघटिकाः for (पश्चात् घटिकाः) ६. क्रत्वा for (कृत्वा) (क) १. षड्गृह for (षड्ग्रह) २. युतास्तमय for (युतोस्तमय) ३. अधिकेन for (अधिकं चेत्)
( १२० ) तात्कालिकोपकरणैः५ सकृदागतनाडिकाभिरह्नीन्दौ।१ २ रात्रौ३ वा प्रति घटिकं प्राग्वच्छं६ गोन्नतिः धार्या४ ॥ २४ ॥ मध्यच्छाया रविवत् स्वक्रान्त्या दर्शनेमनीष्टाच।४ एवं५ भ२ मुनीनामन्तर६ घटिका गुणं७ भुक्तिः३ ॥ २५ ॥ षष्ट्या विभजेत्३ लब्धं प्रागुदयास्तमययोः ग्रहे४ शोध्यम्। पश्चात् क्षेप्यं प्रतिदिनमुदयस्तम५ यास६ कृदेवं२ ॥ २६ ॥
२४. (घ) १. रहींदो (ग) रहींदोः for (रह्नींदौ)
४. कार्याः (च) for कार्या
(ग) १. सकृतागत for (सकृदागत)
५. तात्कालिकोपकरणे for (तात्कालिकोपकरणैः)
(क) १. शकृद् for (सकृदागत) २. रहीदोः for (रह्नींदौ) ३. राश्रो for (रात्रौ)
३. घटिका for (घटिकं)
२५. (घ) ३. कांत्या for (क्रान्त्या)
१. सतीष्टा (ग) सती च for (मनीष्टा)
५. एवं ग्रह (ग) for (एवं भ)
६. मनीना (ग) मुनीना for (मुनीना)
७. गुणां for (गुणं) (ग) गुणाभक्तम् for (गुणं भुक्तिः)
(च) १. सतीष्टा for (मनीष्टा)
५. एवं ग्रहभ for (एवं भ)
(क) १. सतीष्टा for (मनीष्टा) २. ग्रह for (भ) ३. भुक्तिम् for (भुक्तिः)
२६. (घ) ३. विभजेल्लब्धं (ग) for (विभजेत्लब्धं)
४. ग्रं ह (ग) ग्रं हे (च) for (ग्रहे)
५. उदयास्त (ग) for (उदयस्त)
६. मयावसकृदेवं (ग) for (मयासकृदेवं)
(च) ३. विभजेल्लब्धं for (विभजेत्लब्धं)
७. विसर्गलुप्त
१. पश्चाक्षेप्यं for (पश्चात्क्षेप्य)
६. मयावसक्रदेवं for (मयासकृदेवं)
(क) ६. क्षेप्यत्र for (क्षेप्यं)
२. सकृदवम् for (सकृदेवं)
( १२१ ) ⁴इष्टात्कालात् ²भानोरुदयास्ताद्वा गृहोदयास्तमयैः¹ । तात्कालिकै³र्विलग्न⁵गृहोदयास्तमयलग्नाद्यैः ॥ २७ ॥ प्रागुदयलग्नमुदयै¹र्लग्नसमं⁴ लग्नमुदय²लग्नेन । ⁵पश्चात्³ तद् घटिकाभिः कृत्वा तात्कालिकै⁶रसकृत् ॥ २८ ॥ ⁴उदयं प्रागस्तमयो लग्नेन पश्चान्नषड्ग्रहा¹स्तमयः । लग्नं ³पश्चाल्लग्नचक्राद्धं संयुतास्तमये² लग्नेन ॥ २९ ॥ ¹ऊनोलपभुक्तिरुदितः प्रागथवो देष्यति गृहः सूर्यात् । पश्चादधिकोधिकगतिरल्पगतौ वक्रितौ ज्ञसितौ ॥ ३० ॥
२७. (घ) २. कालाद्द्वानो (ग) (च) for (कालात् भानो)
१. मयै (ग) मयौ for (मयैः)
३. विलग्न (ग) (च) for (विलग्नं)
(ग) ४. इष्टा for (इष्टात्)
५. होदयास्तमय......for (ग्रहोदयास्तमय)
(च) १. मयै for (मयैः)
(क) १. मयौ for (मयैः)
२८. (घ) ३. पश्चात्तद्घटिकाभिः for (पश्चात् तद् घटिकाभिः:)
५. पश्चात्त for (पश्चात् तद्)
(च) ५. पश्चाद्घटिकाभिः for (पश्चात् तद् घटिकाभिः:) ६ क्रत्वा for (कृत्वा)
(क) १. मदयै for (मुदय
( १२२ ) प्रागूनाधिकभुक्तिः पश्चादधिकोल्पभुक्तिरस्तमितः । यास्यत्यथवास्तमयं यतस्ततो दृश्यघटिकोक्तिः ॥ ३१ ॥ घटिकाद्वयेन चन्द्रो दृश्योर्कात् सितगुरुज्ञशनिभौमाः । अध्यर्द्धा या घटिकाया त्रिभागघटिको ज्ञ (त्त) राधिकाय ॥ ३२ ॥ ग्रहसूर्यान्तरघटिका स्वभुक्ति लिप्तानि स्वनयुतयोश्च । प्राग्वदनंतर हृताहीनाधिकनाडिका दिवसाः ॥ ३३ ॥
| चं | शु | बृ | बु | श | मं |
|---|---|---|---|---|---|
| २ | ३ ० | १ | २ | १ | २ |
| ०० | ०० | ५० | ०० | ३० | ५० |
३१. (घ) १. प्रागूनोधिकभुक्तिः for (प्रागूनाधिकभुक्तिः)
(क) २. संमितः for (स्तमितः)
३२. (घ) १. घटिकया (ग) (च) for (घटिकाया)
३. घटिकोत्तराधिकया (ग) (च) for (घटिकोत्तराधिकाय)
(ग) ४. अध्यर्द्धयं for (अध्यर्द्धया)
(च) ५. दृश्योर्कात् for (दृश्योर्कात्)
(क) १. शित for (सित) २. घटिकया for (घटिकाया) ३. शशिकोत्तरा for (घटिकोत्तरा)
७
| चं | शु० | बृ० | बु० | श० | मं |
| :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: |
| ३ | १ | १ | २ | २ | २ |
| | ३ | ५० | १० | ३० | ५० |
३३. (घ) ४. घटिकाः (ग) (च) for (घटिका)
५. रूनयुतयोश्च (च) for (स्वनयुतयोश्च)
२. प्राग्वत्तदंतर (च) for (प्राग्वदनंतर)
३. हृता (ग) कृता for (हृता)
७
| चं | शु० | बृ० | बु० | श० | मं० |
| :---: | :---: | :---: | :---: | :---: | :---: |
| ३ | १ | १ | २ | २ | २ |
| | ३ | ५० | १० | ३० | ५० |
६. दिवसा (च) for (दिवसाः)
(ग) ८. युततयोश्च for (युतयोश्च)
(च) ३. हृता for (हता)
(क) १. लिप्ताभिरून for (लिप्तानिस्वन.)
(ग) २. तदंतर for (दनंतर)
३. हृवा for (हृता)
( १२३ ) विपरित$^६$धनमृणं$^१$ सौम्यशुक्रयोर्वं$^७$क्रिणोः स्वभुक्तिकलाः$^२$ । एवमुदयास्तमययो$^३$ विपरितं$^८$ वक्रिणः$^४$ स्वफलम्$^५$ ॥ ३४ ॥ विक्षेपो$^१$ दक्षिणतस्तत्क्रांतेर्भाग$^२$ सप्तसप्तत्या$^४$ । मिथुनस्य सप्तविंशे भागे$^३$नस्त्योन्नतैर्भागैः ॥ ३५ ॥
३४. (घ) ६. विपरीत (ग) for (विपरित)
७. विक्रणोः for (वक्रिणो)
३. एवनुदयास्तमययो (ग) एवमुदयास्तममयो for (एवमुदयास्तमययो)
८. विपरीतं (ग) for (विपरितं)
(ग) १. ऋणधनं for (धनमृणं)
(च) ७. विक्रिणों for (वक्रिणोः)
८. विपरितं for (विपरितं)
(क) १. ऋणाधनं for (धनमृणं)
२. कालः for (कलाः)
३. उदक for (उदया)
४. वक्रिणि (ग) for (वक्रिणः)
५. फलाम् for (फलम्)
३५. (घ) १. विक्षिप्तो (ग) for (विक्षेपो)
२. वक्रांते (ग) तत्क्रान्ते for (तत्क्रान्ते)
३. नस्त्योन्नतै भागैः (ग) गस्त्योनतैर्भागैः for (नस्त्योन्नतैर्भागैः)
(ग) ४. 'सप्त' यह पद यहां अंकित नहीं ।
(च) १. विक्षेप्रो for (विक्षेपो)
२. तत्क्रांते for (तत्क्रान्ते)
३. नस्त्योन्नत्तैभागैः for (नस्त्योन्नतैर्भागैः)
(क) १. विक्षिप्तो for (विक्षेपो)
२. स्व for (स्त)
३. भागेरगेस्त्योर्नतैः for (भागेनस्त्योन्नतै)
( १२४ ) नवतेस्तनैर्द्द¹श्यो घटिका³द्वितयेन तदुदय²विलग्नम् उदयै⁶रधिकं कृत्वा⁷ तदुदय⁴सूर्योस्तमयलग्नम् ॥ ३६ ॥ षड्भयु⁵तमूनमुदयैः षड्राशियु¹तं तदस्तमय²सूर्यः । घटिका³द्वितयेनैवं षड्भाग⁴युतेन मृगेहंतु⁶ ॥ ३७ ॥ एवं⁴ नक्षत्राणां घटिकाद्वितये⁵न सत्रिभा¹गेन । उदया²र्कोस्तमयार्का व्यस्तो³नस्तत्सदादृश्यम् ॥ ३८ ॥ ३६. (घ) १. रुनैहश्यो (ग) रुनैर्द्दश्यो for (स्तनैर्द्दश्यो) ३. ९० घटिका for (घटिका) (ग) ४. तदूदय for (तदुदय) (घ) ५. रुनैद्दश्यो ९० for (स्तनैर्द्दश्यो) ६. रुदयै for (उदयै) ७. क्रत्वा for (कृत्वा) (क) १. रूनै for (स्तनै) २. विलग्नम) for (तदुदयविलग्नम्) ३७. (घ) २. तदस्तमसूर्यः for (तदस्तमयसूर्यः) ३. घटिद्वितयेनैवं for (घटिकाद्वितयेनैवं) ४. षड्भागायुतेन (च) for (षड्भागयुतेन) (ग) ५. भार्द्धयुत for (षड्भयुत) ६. हंतुः for (हंतु) (च) ७. मृगहंतु for (मृगेहन्तु) (क) १. रासि for (राशि) ३८. (घ) १. सतुभागेन (च) for (सत्रिभागेन) ३. व्यस्योनस्तत्सदा (च) for (व्यस्तोनस्तत्सदा) (ग) ४. नक्षत्राणामेवं for (एवं नक्षत्राणां) ५. द्वितेन for (द्वितयेन) २. उदयार्को मस्तयर्काच्चस्योनस्तदादृश्यम् for (उदयार्कोस्तमयार्का व्यस्तोनस्त- त्सदादृश्यम्) (च) २. उदयार्कोस्तमयार्का for (उदयार्कोस्तमयार्का) (क) १. त्रिभागेन for (सत्रिभागेन २. उदय (लक्ष्य) लग्नमधिक्ं कृत्वा पूर्व्ववदुदयास्- स्तार्या भवति for (उदयार्कोस्तमयार्काव्यस्तोनस्तदादृश्यम्)
( १२५ ) उदयास्तसूर्योंरन्तरे³ रवौ दृश्यते⁴ऽन्यथास्तमितः² । ऊनाधिकारविकला रविभुक्त्या भाजिता दिवसाः ॥ ३६ ॥ षड्विंशो¹ मिथुनांशेः⁶ शकचत्वारिंशता ४० मृग व्याधः² । तक्रांतेर्दक्षरातो³ विक्षिप्तागस्त्यवच्छेषम्⁴ ॥ ४० ॥ गुणिता व्यासाद्धेन स्वक्रान्तिज्यावलंबकहतांग्रा¹ । प्रतिदिनमुदयास्तमया वर्गाग्रे² भग्नहमुनीनो³ ॥ ४१ ॥ ३६. (घ) १. उदयास्तसूर्यायारंतरे (ग) उदयास्तासूर्यो for (उदयास्तसूर्योंरंतरे) २. स्तमित for (स्तमित) (ग) न्यथास्तमितिः for (ऽन्यथास्तमितः) ३. ऊनाधिकार (ग) for (ऊनाधिकार) (ग) ४. दृश्यतेः for (दृश्यते) (च) १. उदयास्तसूर्यायोरन्तरे for (उदयोस्तसूर्योंरन्तरे) २. न्यथास्तमित for (ऽन्यथास्तमित) (क) ६. सूययोरन्तर for (सूर्योंरन्तरे) ४०. (घ) १. षड्विंशे (ग) (ग) for (षड्विंशो) ५. तत्क्रांतेर्दक्षिणतो (ग) तत्क्रांतोर्दक्षिणतो for (तक्रान्तेर्दक्षरातो) ४. विक्षिप्तोगस्त्यवच्छेष (ग) विक्षिप्तोगस्त्यवच्छेषम् for (विक्षिप्तागस्त्य- वच्छेषम्) (ग) ६. मिथुनांशेड्शक for (मिथुनांशेः शक) (च) ५. तत्क्रांते for (तक्रांते) ३. दक्षिणतो for (दक्षरातो) (क) १. विंशे for (विंशो) २. व्याधेः for (व्याधः) ३. दक्षिण for (दक्षरातो) ४. विक्षेपोऽगस्त्य for (विक्षिप्तागस्त्य) ४१. (घ) १. ज्यावलंबलकहताग्रा (ग) ज्यावलंबकोद्धृता स्वाग्रा for (ज्यावलंबकहताग्रा) २. वग्राग्रे (ग) for (वर्गाग्रे) ३. मुनीनाम् (ग) भग्रहमुनीनाम् (च) for (भग्नहमुनीनो) (च) १. हृताग्रा for (हताग्रा) (क) १. प्रतिदिनमुदयास्तमयांवयात्रे वगृहमुनीरमां गुणिता व्यासाद्धैन स्वक्रान्तिज्या साद्धेनानेन for (गुणिता व्यासाद्धेन स्वक्रान्तिज्या वलंबकहताग्रा । प्रतिदिनमुद्योस्त- मया वर्गाग्रे भग्नहमुनीनो ॥)