ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 496, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 496
( ११० ) अष्टनखैर्मै$^५$षगविरदलिप्तोनै$^१$ गुणैः स्वरै$^२$ मिथुने । कर्कटके$^३$ गुणषोडशं धृतिभिः$^६$ सिंहेन व$^७$ त्रिघनैः$^४$ ॥ १ ॥ कन्यायां पंचनखैस्तुलिनि अधिधृतिभिरलिनी$^१$ सेषुकाले । द्विचतुर्द$^२$शाति धृतिभि$^४$ धनुषि शंशाक मनुतत्वैः$^३$ ॥$^५$ २ ॥
१. (घ) ५. मोखग (ग) मोषग for (मैषग)
१. लिप्तोनैर्गुण (ग) लिप्तोनैर्गुण for (लिप्तोनैर्गुणैः)
२. स्वस्वरैर्मिथुने (ग) for (स्वरै मिथुने)
६. धृतिभि (च) for (धृतिभिः)
७. च (च) for (व)
(ग) ३. कक्र्कटके गुणषोडश for (कर्कटकें गुणषोडशं)
४. त्रिघनैः for (त्रिघनैः)
(च) ५. मेंखे for (मेंष)
१. र्गुणास्वरैर्मिथुने for (गुणैः स्वरैर्मिथुने)
८. षोडश for (षोडशं)
४. त्रिद्यनैः for (त्रिघनैः)
(क) १. र्गुण for (गुणैः)
३. कर्कटे for (कर्कटके)
४. त्रिघनैः for (त्रिघनैः)
२. (घ) १. व्यतिधृतिभिरलिनि सषुकालेः (ग) व्यतिधृतिभिरलिनिसेषुकलैः for
(अधिधृतिभिरलिनी । सेषुकाले)
४. धृतिभिर्धनुषि (ग) (च) for (धृतिभिधनुषि)
३. मनुखतस्त्वै (ग) मनुनखतत्त्वैः for (मनुतत्त्वैः)
(ग) २. द्विचतुर्दशानि for (द्विचतुर्दशाति)
(च) १. अतिधृ तिभि रलिनि (अधिधृतिभिरलिनी)
५. क्रमसंख्या लुप्त
(य) १. व्यतिधृतिभि रलितेषुकलैः for (अधिधृतिभिरलिनी सेषुकाले)
२. दशा विघृतिः for (दशातिधृतिभिः)
३. मनुनखै तत्वैः for (मनुतत्त्वैः)