ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ११५ ) भमुनिमृगव्याधानां यतस्तद्दहष्टिकर्म वक्ष्यामि । दृग्गणित समदेयं शिष्याय चिरोषितायेदम् ॥ १४ ॥
| अ | भ | कृ | रो | मृ. | आ. | पु. | पु. | अ. | म. | पू | उ | ह. | चि | स्वा | वि | श्र. | जे | र |
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| ०० | ०० | १ | १ | २ | २ | ३ | ३ | ३ | ४ | ४ | ५ | ५ | ६ | ६ | ७ | ७ | ७ | ८ |
| ८ | २० | ७ | १६ | ३ | ७ | ३ | १६ | १८ | ६ | २७ | ५ | २० | ३ | १६ | २ | १४ | १६ | १ |
| ०० | ०० | २८ | २५ | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० |
| ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०२ | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० |
| श | उ. | श्र. | श्र | घ | श | पू | उ. | रे |
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| ८ | ८ | ८ | ६ | ६ | १० | १० | ११ | १२ |
| १४ | २० | २५ | ८ | २० | १० | २६ | ७ | ०० |
| ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० |
| ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० | ०० |
१४ (घ) १. ततो (च) त for (तद) १. ज्ये ३. मू ६. पू ७ ३. वक्षामि (ग) कक्षामि for (वक्ष्यामि) १६ ४. पू ५ ० ४. समं (च) for (सम) ७. वि ८. श्र० ५. श. ७ ७ १० (ग) ५. दृष्टकर्म for (दृष्टिकर्म) २ १४ २६ ५ ५ ० २. दस्पात्र for (दृग्गणित) ० ० ६. विरोषितायेदम् for (चिरोषितायेदम्) (च) ७. ब्याध्यानां for व्याधानां ३. वक्षामि for वक्ष्यामि ८. सिष्याय for (शिष्याय) (क) १. ततो for (तद) २. न माणित for (दृग्गणित) (च) ७. वि. ८. श्र. १. ज्ये० ३. मू for (र) ४. पू for (श) ५. श० ७ ७ १ ८ ८ १० २ १४ १६ १ १४ २६ ५ ५ ५ ० ० ० ० ० ० ० ० ०