ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 502, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 502
( ११६ ) (घ) केवलमात्र परिवर्तित रूप – शेष सब ठीक है । वि. ज्येष्ठ० ३. मू. ४. श. ५. श. ६. पू ७ ७ ८ ८ १० , २ १६ १ १४ २६ , ५ ५ ० ० ० , ० ० ० ० ० , अतिरिक्त – विक्षेपाः अ भ | कृ | रो | मृ | आ | पु | पु | अ | म | पू | उ | ह | त्रि १० १२ | ५ | ५ | १० | ११ | ६ | ० | ७ | ० | १२ | १३ | १३ | २ १ | | | | | | | | | | | | स्वा वि | अ | ज्ये | मू | पू | उ | उ | श्र | ध | श | पू | उ | रे २७ १ | ० | ४ | ५ | ५ | ५ | १२ | ३० | ३६ | ० | २४ | २६ | ० ३० | | |