ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( ११४ ) विक्षेपंत्ये सौम्ये तृतीयातारां भिनत्ति पित्र्यस्य । इन्दुर्भिनत्ति पुष्पं पौष्णं वारुणमविक्षिप्तः ॥ १२ ॥ कृत्वापि दृष्टिकर्म श्रीषेणाचार्यभट विष्णुचन्द्रोक्तम् । प्रतिदिनमुदयेऽस्ते वा न भवन्ति दृग्गणितयोरैक्यम् ॥ १३ ॥
१२. (घ) १. विक्षोपंत्ये for (विक्षेपंत्ये)
४. सौम्ये । २७० । (च) for (सौम्ये)
५. भिनति for (भिनत्ति)
६. इंदुभिनत्ति (ग) (च) for (इन्दुर्भिनत्ति)
(ग) ७. त्र्यस्य for (पित्र्यस्य)
(क) १. विक्षेपोंऽत्ये for (विक्षेपंत्ये)
२. पुशां for (पुष्पं)
३. करूण for