भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

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पृष्ठ 521

( १३५ ) ग्रहयोगोत्रे^१ ग्रहयुतिरार्यात्रिशति^३ युताष्ट सप्तत्या ३७८ अध्यायैर्द^५शभिर् धूलिकर्म^६ वोच्चै^४र्विना ब्रह्मौ^२ ॥ ६६ ॥ गुरुणा न^५धूलिकर्म प्रतिकंचुककारिणे^१ प्रदातव्यम् । दत्त^४ सुकृतप्रणाशं कुरुते प्रतिकंचुकं^२ यस्य^३ ॥ ६७ ॥ गृहमेलके^४ यदुक्तं तत्स्थूलं^५ स्पष्टमिह^३ यदुक्तं तत् । ग्रहभमुनींदु^१ छाया शृङ्गोन्नतिभोदयाद्येषु^२ ॥ ६८ ॥ सूर्यास्तमयादिष्ट्राद्वातिगताच्छेष्ट^२ भोदयास्तमयौ । जानाति न कश्चिदपि ब्राह्मनं मुच्चान्यतन्भज्ञः^३ ॥६६॥

६६. (घ) १. भ (ग) (च) for (त्रे)
(ग) ३. त्रिशती for (त्रिशति)
४. चाद्यै for (वोच्चै)
(च) ५. र्दशभि for (दशभि) ६. धूलिकर्म्म for (धूलिकर्म)
(क) १. भ for (त्रे) २. ब्राह्मी (ग) ब्राह्म्ये for (ब्रह्मौ)
६७. (घ) ३. योस्य (ग) (च) for (यस्य)
(ग) १. प्रतिकंचककारिणे for (प्रतिकंचुककारिणे)
४. सुकृतः प्रणाशः for (सुकृतप्रणाशः)
(च) ५. कर्म्म for (कर्म)
(क) १. प्रातस्थ्यंक कारिणो for (प्रतिकंचुककारिणे)
२. सुर्क योस्या for (चुकंयस्य)
६८. (घ) १. ग्रेहभमुनींदु (ग) for (ग्रहभमुनींदु)
(ग) ३. स्पष्टमिदं for (स्पष्टमिह्)
(च) ५. तस्थूलं for (तत्स्थूलं)
(क) १. ग्रहण मनींदुच्छायो for (ग्रहभमुनींदुच्छाया) २. लोदयाद्येषु for (भोदयाद्येषु)
४. ग्रहामलके for (गृहमेलके) ३. स्पष्ट इह for (स्पष्टमिह)
यह यहीं समाप्त है ।
६६. (घ) १. दिष्ट्याद्वग्रारिगता for (दिष्ट्राद्वातिगता) (ग) सूर्यास्तमयाद्वारात्रिगता for
(सूर्यास्तमयादिष्ट्राद्वातिगता)
२. द्वेष्ट (ग) स्वेष्टभोदयास्तमयोः for (छेष्टभोदयास्तमयौ)
३. ब्राह्मं मुत्वान्यतंत्रज्ञः (ग) ब्राह्मं मुक्तान्यतंत्रज्ञः fo1 (ब्राह्मनं मुच्चान्यतन्भज्ञः)
(क) यह श्लोक उपलब्ध नहीं,
(च) १. दिष्ट्याद्वग्रारिगता for (दिष्ट्राद्वातिगता) २. द्वे ष्ट for (छेष्ट)
३. ब्राह्मं मुच्चान्यतंत्रज्ञः for (ब्राह्मनंमुच्चान्यतंत्रज्ञः)