ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 524, कुल 737 में से
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( १३८ ) भानि ध्रुवपंचाशत्¹ द्वावर्कादियो⁴ जिनोक्तं यत् । ध्रुवमस्यावर्णो² भवति यतोऽह्ना³ ततो सतत् ॥ ३ ॥ आर्यभटो¹ युगपादांस्त्रीन् पातानाह⁴ कलियुगादौ यत् । ३२४०००० तस्य कृतांतर्यस्मात्² स्वयुगाद्यंतौ न तस्मात्³ ॥ ४ ॥ रवियुगभगणां⁴ रव्धुधृति⁵ ४३२००००¹ यत्प्रोक्तं तंत्रयो²र्युगं⁶ स्पष्टम्³ । त्रिंशतीरव्युदयानां तदन्तरं हेतुना केन ॥ ५ ॥
३. (घ) १. पंचांशत् for (पंचाशद्) (ग) चतुः पंचाशत् द्वौ for (ध्रुवपंचाशत् द्वा)
२. ध्रुवमत्सस्या (ग) ध्रुवमत्सस्यावर्त्तो for (ध्रुवमस्यावर्णो)
३. यतोह्ला ततोसत्तत् (ग) for (यतोह्नाततो सतत्)
(च) ४. द्रावर्कादियौ for (द्रावर्कादियो)
२. ध्रुवमत्सस्यावर्णो for (ध्रुवमस्यावर्णो)
३. यतोह्ना ततो सत्तत् for (यतोह्ना ततो स तत्)
४. (घ) १. अर्यभटो for (आर्यभटो) (ग) आर्यभटोस्रुत for (आर्यभटोयुग)
२. यस्मातं for (र्यस्मात् स्व)
३. तत्तस्मात् (ग) for (न तस्मात्)
(ग) ४. यतोनाह for (पातानाह)
(च) १. अर्यभटो for (आर्यभटो)
३. न तत्तस्मात् for (न तस्मात्)
५. (घ) १. ४३२००० (च) for (४३२००००)
२. तंत्रयौ for (तंत्रयो)
३. स्पष्टान्यत् for (स्पष्टम्)
वि०—इस श्लोक की दूसरी पंक्ति यहां लिपिकार लिखना भूल गया प्रतीत
होता है। यही नहीं छठे श्लोक की पहली पंक्ति भी यहां लुप्त है।
(ग) ४. युगरविभगणाः for (रवियुगभगणां)
५. रव्युद्रिति for (रव्युधृति)
६. युगं for (र्युगं)
७. +३०० ॥०॥+
(च) १. ४३२०० यत्पोक्तं for (४३२००००