भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 525

( १३६ ) युगवर्षादिनवदच्चैत्र सितादेः समं प्रवृत्तान्यत् । तदसत् यतः स्फुटयुगं तस्स्थैर्यान्मंदपातानाम् ॥ ६ ॥ ग्रहभुक्तेरूनाया मंदोच्चं भवति शीघ्रमधिकायाम् । उच्चगतौ मंदोच्चं न विना भुक्तेंदु वर्जमेतः ॥ ७ ॥ आर्याष्टशते पाता भ्रमंति दशगीतके स्थिराः पठिताः । मुक्तेर्दुपातमंडपमण्डले भ्रमति स्थिरानातः ॥ ८ ॥ आर्यभटो जानाति गृहाष्टाति यदुक्तवांस्तदसत् । राहुकृतं न ग्रहणं तत्पातो नाष्टमो राहुः ॥ ९ ॥

६. (घ) यहां श्लोक का पूर्वार्ध लुप्त है ।
१. तदराजू (ग) तदसद्युतः for (तदसत्—तदसत् यतः)
२. तत्स्थैर्यान् (ग) स्थैर्यान् for (तस्स्थैर्यान्)
(ग) ३. युगवर्षादी for (युगवर्षादि)
४. सप्रवृत्तानयत् for (समं प्रवृत्तान्यत्)
५. युतं गं न for (युगं)
७. (घ) १. रूनायां for (रूनाया)
२. भुक्त्येंदु for (भुक्तेंदु)
३. वर्जमतः for (वर्जमेतः)
(ग) ४. परिधि फले व्यावहारिक त्रोगुणे for (मंदोच्चं भवति शीघ्रमधिकायाम्)
५. दूसरी पंक्ति बिल्कुल भिन्न है—
'तद्गभ्यां दशभिः संगुणिताभ्यां सूक्ष्मे'
वि०—तीसरी पंक्ति यह है—
उच्चं भवति शीघ्रमधिकायां । उच्चगतौ मंदोच्चं न विना भुक्त्येंदुवर्जमनः ॥७॥
अर्थात् रेखांकित दो पंक्तियां अधिक हैं ।
८. (घ) १. आर्याऽष्टशते (च) for (आर्याष्टशते)
२. दशगीतेके (ग) दशगीतिके for (दशगीतके)
३. मुक्त् वेन्दु (ग) for (मुक्तेर्दु)
४. भ्रमंति (ग) for (भ्रमति)
(ग) ५. मपमंडले for (मंडपमण्डले) (च)
(च) २. दशरगीतके for (दशगीतके)
९. (घ) १. ग्रहाष्टकर्गात (ग) for (ग्रहाष्टाति)
२. तस्पातो (ग) तस्यातो for (तत्पातो)
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