भारतकोश
ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary

आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा

DevanagariHindipublished737 पृष्ठ

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पृष्ठ 532

( १४६ ) विक्षेपगुणा¹क्षज्या⁴ लंबभक्ता ग्रहे² मृणधनं यत् । उक्तमुदयास्तसमयोनै³ प्रतिघटिकं⁵ ततस्तदसत् ॥ ३४ ॥ त्रिज्या कृत्या⁶ भक्ता विक्षेपापक्रमगुणो⁴ क्रमज्यैदोः⁷ । अयनांतेमृणधनं¹ न तदयनादौ⁵ ततौ² सा³ तत् ॥ ३५ ॥ दृक्कणं¹ विज्ञानात्² कालाविज्ञानमकथितत्वाच्च । कालज्ञानाच्छंकोरज्ञानं कोटिनाशोतः ॥ ३६ ॥ शशिशंकोः शच्यपैराकोटि²र्भुजवर्ग⁴युतिमूलम् । तिर्यक्कर्णो न भवति यतो³ चन्द्रांतरं कर्णः ॥ ३७ ॥

३४. (घ) १. गुण for (गुणा)
२. गृहे (ग) गृहेष्वृण for (ग्रहे)
३. मययो (ग) for (समयो)
(ग) ४. य्या for (ज्या)
५. नंम्प्रतिघटिकं for (न्नैंप्रतिघटिकं)
(च) १. गुणाक्ष्यज्या for (गुणाक्षज्या) २. गृहे for (ग्रहे)
३५. (घ) १. यदृण (ग) (च) for (मृण)
२. ततो (ग) for (ततौ)
३. सत्तत् (च) for (सातत्)
(ग) ४. विक्षेपायनगुणोत् for (विक्षेपापक्रमगुणो)
५. तत्तस्यादौ for (नतदयनादौ)
(च) ६. क्रत्या for (कृत्या) ७. गुणोत्क्रम for (गुणोक्रम)
३६. (घ) १. दृकर्मा (ग) (च) for (दृक्कणं)
२. विज्ञातात् for (विज्ञानात्)
३७. (घ) १. प्राच्य (ग) (च) for (शच्य)
२. कोटिकोठि (ग) कोटिः कोटि for (कोटि)
३. र्यतोर्कचंद्रांतरं (ग) for (यतोचंद्रांतरं)
(ग) ४. वर्य for (वर्ग)
(च) ३. र्यतो for (यतो)