ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
पृष्ठ 642, कुल 737 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 642
( २५८ ) भगणादिशेष वर्गं त्रिभिर्गुणं संयुक्तं शतैर्नवभिः¹ । ³वर्गोऽष्टशतोनां वा कुर्वन्नावत्सराद् गणकः ।। ७४ ।।² अधिमासशेषवर्गं³ त्र्योदशगुणं¹ त्रिभिर्युक्तम्⁴ । त्रिघनोनां वा वर्गं⁵ कुर्वन्नात्सराद्² गणकः ।। ७५ ।। अवमावशेषवर्गं द्वादशगुणितं शतेन संयुक्तम् । त्रिभिरूनं वा वर्गं कुर्वन्नावत्सराद् गणकः¹ ।। ७६ ।।
७४. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ७५ है)
(ग) १. शनैन्नवभिः for (शतैर्नवभिः)
(वि०—इसकी क्रमसंख्या ७८ है)
(च) २. (वि०—क्रमसंख्या ७५ अंकित है)
(ङ) ३. कृतिमष्ट for (वर्गोऽष्ट)
७५. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ७६ है)
१. त्रयोदश (ग) for (त्र्योदश) २. कुर्वन्नावत् (ग) (ङ) for (कुर्वन्नात्)
(ग) ३. वग्र° for (वर्गं) ४. त्रिभिः शतैर्युक्तम् (ङ) for (त्रिभिर्युक्तम्)
५. वग्रं for (वर्गं)
(वि०—इसकी क्रमसंख्या ७६ है)
(च) १. त्रयोदश (ङ) for (त्र्योदश)
६. (वि०—यहां क्रमसंख्या ७६ अंकित है)
७६. (घ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ७७ है)
(च) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ७७ है)
(ङ) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ८२ है)
(ग) (वि०—इसकी क्रमसंख्या ८० है)
७६. संख्या पर अंकित निम्नांकित अतिरिक्त श्लोक है—
सूर्यादि¹ विलिप्ताशेषं पंचभिरूनादुगतं² तथा दशभिः ।
वर्गो³ बृहस्पति दिने कुर्वन्नावत्सराद् गणकः ।। ७६ ।।
(वि०—यह श्लोक इस प्रति में क्रमसंख्या ७६ पर है)
१. सूर्ये for (सूर्यादि) २. रूनाहतं for (रूनादुगतं)
३. वर्गे for (वर्गो)