ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २८७ ) विक्षेपौ⁶ यद्यूनः शुक्लेतर पंच³ दृश्यंते । महदिदो⁷ रावरणं⁴ कुठ⁵ विषारणो यतो² संछन्नः ॥ ३५ ॥⁸ अर्द्धच्छिन्नो⁵ भानुस्तिक्षरण¹ विषारणस्ततो स्याल्पे² । यदि राहुः प्राग्भांदिदु³ छादयति किं तथा नार्कम् ॥ ३६ ॥४
३५. (घ) १. दश्यंते (ङ) for (दृश्यन्ते)
(यहां ३५ की संख्या अङ्कित है)
२. द्धंसंछन्नः (ग) र्धसंछन्नः (ङ) र्ध्व सञ्छन्नः for (संछन्नः)
(ग) ३. पंचं for (पंच)
१. दिश्यंते ॥३६॥ for (दृश्यंते)
४. रादरणं for (रावरणं)
५. कुठ (ङ) for (कुठ)
वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध ३७ वें श्लोक का पूर्वार्ध है)
(च) ६. विक्षेपो for (विक्षेपौ)
३. पुंद्रश्यंते ३५ for (पंचदृश्यंते)
७. महर्दिदो (ङ) for (महदिदो)
२. यतोर्द्धं for (यतो)
८. (वि०—यहां कोई क्रमसंख्या अंकित नहीं है)
(ङ) ४. रावरणां for (रावरणं)
३६. (घ) १. स्तीक्ष्ण (ग) (ङ) for (स्तिक्षरण)
२. ततोऽस्याल्पम् (च) (ङ) for (ततोस्याल्पे)
(वि०—यहां क्रमसंख्या ३६ दी है)
३. प्राग्भागा॑र्दिदु (ग) प्राग्भांदिंदुं for (प्राग्भांदिदु)
(ग) २. ततोऽस्याल्पी ॥३७॥ for (ततोस्याल्पे)
(वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध ३८ वें श्लोक का पूर्वार्ध है)
(च) १. स्तीक्षण for (स्तिक्षरण)
४. (वि०—यहां कोई क्रमसंख्या नहीं दी, क्योंकि इस प्रति के अनुसार यहां का
उत्तरार्ध ३७ वें श्लोक का पूर्वार्ध है।
(ङ) ५. अर्धच्छन्तो for (अर्द्धच्छिन्नो)
२. प्राग्भागादिन्दुं for (प्राग्भांदिदु)