ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( २८८ ) स्थित्यर्द्धं¹ महदिन्दो यथो⁵ तथा किन्न सूर्यस्य² ।⁶ किं प्रतिविषयं³ सूर्यो⁴राहुश्चान्यो यतो रविग्रहणे ॥ ३७ ॥ ग्रासान्यत्वं न ततो राहुक्तं¹ ग्रहण मर्कद्धोः² । एवं वराहमिहिरश्रीषेणार्य³भटविष्णुचंद्राद्यैः ॥ ३८ ॥⁴ लोक विरुद्धमभिहितं वेदस्मृति¹संहिताबाह्यम्⁴ । यद्येवं⁵ ग्रहणफलं गर्गाद्यैः संहितामु²दय³भिहितम् ॥ ३६ ॥ ३७. (घ) १. स्थित्यद्धं for (स्थित्यर्द्धं) २. सूर्यः स्य (यहां क्रमसंख्या ३७ दी है) (ग) सूर्यस्य ।।३८।। for (सूर्यस्य) ३. विषण्रं (ग) विखयं for (विषयं) (ग) (वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध ३६ वें श्लोक का पूर्वार्ध है । ४. सूयो for (सूर्यो) (च) ५. यंथा (ङ) for (यथा) २. (वि०— यहां क्रमसंख्या ३७ अंकित है) ६. वि०—यहां कोई क्रमसंख्या नही दी है, क्यों कि इस श्लोक का उत्तरार्ध, ३६ वें श्लोक का पूर्वार्ध है । (ङ) १. स्थित्यर्धं for (स्थित्यर्द्धं) ३८. (घ) १. कृतं (ग) (च) (ङ) for (क्रतं) २. मर्केंद्वोः (ग) मर्केंद्वोः ।।३६।। for (मर्कद्धो) (यहां ३८ संख्या दी है) (ग) ३. श्रीषेणाचार्यं for (श्रीषेणार्य) इस श्लोक का उत्तरार्ध, ४० वें श्लोक का पूर्वार्ध है । (च) २. मर्क द्दोः for (मर्कँद्दो.) (वि०— यहां श्लोक संख्या ३८ अंकित हैं) ४. यहां क्रमसंख्या लुप्त है, क्योंकि यह ३६ वें श्लोक का पूर्वार्ध है । (ङ) २. मर्केंद्वोः for (मर्कद्धोः) ३६. (घ) १. स्त्रिम्मृवि for (स्मृति) (यहाँ संख्या ३६ है) २. संहितासु (ग) (ङ) for (संहितामु) ३. यदि भिहितम् (ग) for (दयभिहितम्) (ग) ४. संहिताद्वाह्यम् ॥ ४० ॥ for (संहिताबाह्यम्) ५. यद्येव ग्रहफलं for (यद्येवं ग्रहणफलं) (वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध ४१ वें श्लोक का पूर्वार्ध है । (च) ४. यहाँ '३६' की क्रमसंख्या अंकित है । परन्तु उत्तरार्ध के अन्त में कोई क्रमसंख्या अंकित नहीं, क्योकि उत्तरार्ध, ४० वें श्लोक का पूर्वार्ध माना जाता है । (ङ) ३. यदभिहितम् for (दयभिहितम्)