ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २६० ) श्रुतिसंहितास्मृतीनां भवति तथैक्यं¹ तदुक्तिरत:³।² राहुस्तच्छादयति प्रविशति यच्छुक्ल⁴ पंच दश्यन्ते ॥ ४३ ॥ भूच्छाया तमसींदो⁴ वरप्रदानात्कमलजस्य।५ ¹ चन्द्रोवुभयो²धस्थो³ यदग्निमय⁶ भास्करस्य मासांते ॥ ४४ ॥ छादयति शमिततयो³ राहु छादयति⁶ तत्सवितु:।⁴ ¹ भूच्छाया व्याससम:² शशिकक्षायां स्थित: शशिग्रहणे ॥ ४५ ॥५
४३. (घ) १. यथैक्यं (ग) (च) (ङ) for (तथैक्यं)
२. (वि०—यहाँ क्रमसंख्या ४३ दी है) (च) (ङ)
(ग) ३. रंत: ॥ ४४ ॥ for (रत:)
४. यत् शुक्ल पंच दृश्यंते for (यच्छुक्ल पंचदश्यन्ते)
(च) (वि०—यहाँ इस श्लोक के अन्त में कोई क्रमसंख्या अंकित नहीं क्योंकि
यह उत्तरार्ध यहाँ ४४ वें श्लोक का पूर्वार्ध माना जाता है)
(ङ) ४. यच्छुक्ल for (यच्छुक्ल)
४४. (घ) १. (वि०—यहां क्रमसंख्या ४४ दी है) (च) (ङ)
२. वुमयो (ग) चंद्रोबुमयोघस्थ: for (चन्द्रोवुभयोधस्थो)
३. घस्थो for (स्थ: स्थो)
(ग) ४. नभसींदो for (तमसींदो)
५. त्कमलाया ने ॥४४॥ for (कमलजस्य). ६. यदग्नियम for (यदग्निमय)
(वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध ४५ वें श्लोक का पूर्वार्ध है)
(च) (वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध ४५ वें श्लोक का पूर्वार्ध है)
अतएव यहां अन्त में कई क्रमसंख्या अंकित नहीं ।
(ङ) ५. कमलयोने: for (कमलजस्य)
२. छन्द्रोम्बुमयोऽघ: स्थो for (चन्द्रोवुभयोधस्थो)
४५. (घ) १. (वि०—यहां क्रमसंख्या ४५ अंकित है) (च) (ङ)
२. सम for (सम:)
(ग) ३. शमिततापो (ङ) for (शमिततयो)
४. तच्छवितु: ।।४५।। for (तत्सवितु:)
(वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध, ४६ वें श्लोक का पूर्वार्ध है) (च)
(च) ३. शमिततायो for (शमिततयो) ५. क्रम संख्या लुप्त
(ङ) ६. राहुश्छादयति for (राहुछादयति)