ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)

ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त (ब्रह्मगुप्त - शून्य, कुट्टक, बीजगणित एवं सम्पूर्ण २१ अध्याय सान्वय सटीक)
Brahmasphuta Siddhanta of Brahmagupta with Commentary
आचार्य ब्रह्मगुप्त द्वारा
DevanagariHindipublished737 पृष्ठ
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( २६१ ) राहु छादयतींदुं³ सूर्यग्रहणे⁴ऽर्किंबिंदु¹ समः । यत्तदधिकं तमोमयराहुव्यासस्य सूर्य⁵ द्रष्टं² तत् ॥ ४६⁶ ॥ नश्यति भूछायेंदु व्यास समोऽस्माद्¹ भवति राहुः³ । भूछायानेंदुमतो² ग्रहणे छादयति नार्किंबिंदुर्वा⁴ ॥ ४७⁵ ॥ तत्स्थस्तद्व्याससमो¹ राहुं² छादयति शशिसूर्यौ³ । प्राच्यपरं सममंडलमन्द्यद्याम्योत्तरं क्षितिजमन्यत् ॥ ४८⁴ ॥
४६. (घ) १. बिंदुं समः (ग) (च) (for बिंदुसमः)
(वि०—यहां क्रमसंख्या ४६ अंकित है)
२. दृष्टं तत् (ग) for (द्रष्टं तत्)
(ग) ३. छादयतींदुं for (छादयतींदु) ४. सूर्यं for (सूर्य)
५. ‘सूर्य’ लुप्त पद है।
(वि०—श्लोक का उत्तरार्ध ४७ वें श्लोक का पूर्वार्ध है) (च)
(च) २. दृष्टं for (द्रष्टं) ६. क्रमसंख्या लुप्त
(ङ) ३. राहुश्छादयतीन्दूं for (राहुछादयतीन्दु) २. दृष्टत्वात् for (दृष्टंतत्)
४७. (घ) १. समोऽस्माद् (च) for (समोस्माद्)
(वि०—यहां क्रमसंख्या ४७ दी है)
२. भूछायेंदु for (भूछायानेंदुमतो)
(ग) ३. राहुः ॥४७॥ for (राहुः)
४. बिंदुर्वा for (बिंदुर्वा)
(वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध, ४८ वें श्लोक का पूर्वार्ध है) (च)
(च) २. भूछायातेंदुमतो for (भूछायानेंदुमतो) ४. नार्किंबिंदुवति for (नार्किंबिंदुर्वा)
५. क्रम संख्या लुप्त
(ङ) ६. भूछायेन्द्रोर्व्यास for (भूछायेंदुव्यास)
२. भूछायेंदुमतो for (भूछायानेंदुमतो)
४८. (घ) १. तद्व्यास (ग) (ङ) for (तद्व्यास) २. राहुं for (राहु)
३. (वि०—यहां क्रमसंख्या ४८ अंकित है) (च)
(ग) ३. सूर्यैः ॥४८॥ for (सूर्यौ)
(वि०—इस श्लोक का उत्तरार्ध ४६ वें श्लोक का पूर्वार्ध है) (च)
(च) १. र्छस्तद्वचास for (तत्स्थस्तद्व्यास) ४. क्रमसंख्या लुप्त
(ङ) (वि०—प्रथम पंक्ति समाप्ति पर ‘ग्रहण वासना’ समाप्त)
✛अथगोलबन्धाधिकारः ✛आरम्भ ।
२. राहुश्छादयति for (राहुछादयति)